Jharkhand News : झारखंड में जनजातियों के प्रमुख त्योहार सरहुल को पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया गया। पूरे राज्य में सरना स्थलों (पूजा स्थल) पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ किया गया। रांची के जेल रोड स्थित आदिवासी छात्रावास और सिरमटोली सरना स्थल में पूजा का विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और मेयर रोशनी खलखो उपस्थित रहीं।
सरहुल पर्व नहीं जीने की प्रेरणा
सरहुल पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति से सामंजस्य बनाकर जीने का संदेश देता है। प्रकृति से संतुलन सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की कुंजी है। सरहुल त्योहार जल, जंगल और जमीन के महत्व को समझने और संरक्षण की प्रेरणा देता है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ईद और सरहुल की शुभकामनाएं भी दीं।
इस मौके पर विधायक कल्पना सोरेन ने सरहुल पर्व के सांस्कृतिक महत्ता के बारे में बताया। वहीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि यह पर्व आदिवासी समाज हर वर्ष पारंपरिक रीति-रिवाजों से मनाता है। यह उनकी प्रकृति के प्रति आस्था को दर्शाता है। लोग पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और संगीत के साथ इस उत्सव को मना रहे हैं।
सरहुल पर्व का महत्व
सरहुल पर्व झारखंड के जनजातियों का प्रमुख त्योहार है। इस पर्व को नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। आदिवासी परंपरा में साल(सखुआ) के वृक्ष और उसके फूलों को पवित्र माना गया है। यह पर्व नई फसल के आने, जल-जंगल-जमीन के प्रति आभार जताने और सूर्य-धरती के मिलन के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार में साल के वृक्ष की पूजा की जाती है।
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