Dewas Factory Blast : मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां गांव में गुरुवार सुबह एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया. हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत हो गई. जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री की दीवारें बुरी तरह टूट गईं और शवों के अंग कई फीट दूर तक जा गिरे. हादसे के बाद काफी देर तक फैक्ट्री परिसर में पटाखे फूटने की आवाजें सुनाई देती रहीं.
जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर धीरज, सन्नी और सुमित की मौके पर ही मौत हो गई थी. वहीं गंभीर रूप से झुलसे अमर और गुड्डू ने इलाज के दौरान अमलतास अस्पताल में दम तोड़ दिया. बताया जा रहा है कि मृतकों में चार मजदूर बिहार और एक उत्तर प्रदेश का निवासी था.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय फैक्ट्री के अंदर 20 से अधिक मजदूर मौजूद थे. विस्फोट के बाद कई लोग आग की चपेट में आकर जान बचाने के लिए बाहर भागते नजर आए. फैक्ट्री के आसपास जली हुई सामग्री, बाल और विस्फोटकों के अवशेष फैले मिले, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई.
फैक्ट्री मैनेजर एजाज खान हिरासत में
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया. प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है. पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बिहार निवासी फैक्ट्री मैनेजर एजाज खान को भी हिरासत में लिया गया है. टोंकखुर्द थाना पुलिस ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है.
तय सीमा से ज्यादा बारूद का भंडारण
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में तय सीमा से कहीं ज्यादा मात्रा में बारूद और पटाखों का भंडारण किया गया था. लाइसेंस के अनुसार केवल 15-15 किलो बारूद और 600-600 किलो पटाखे रखने की अनुमति थी, लेकिन मौके से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई.
फैक्ट्री में नाबालिगों से भी कराया जा रहा था काम
जांच में यह भी पता चला है कि फैक्ट्री में बिहार से बड़ी संख्या में मजदूर बुलाए गए थे, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे. इन मजदूरों से 400 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर काम कराया जाता था. फैक्ट्री का लाइसेंस 31 मार्च को समाप्त हो गया था, जबकि उसका नवीनीकरण 6 मई को किया गया. ऐसे में इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि फैक्ट्री क्या लंबे समय तक बिना वैध अनुमति के संचालित होती रही.
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी साल मार्च महीने में भी फैक्ट्री में विस्फोट की घटना हुई थी, लेकिन उस समय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी.
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