Sleeper Bus Rules : केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों के रजिस्ट्रेशन और निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी नई स्लीपर कोच बस का रजिस्ट्रेशन तभी किया जाएगा जब उसमें फायर सेफ्टी सिस्टम और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की पूरी तरह से भौतिक और वीडियो जांच कर ली जाएगी।
बसवर्ल्ड इंडिया कॉन्क्लेव 2026
नए संशोधित ‘बस बॉडी कोड’ के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि बसों में आग लगने जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। गडकरी ने ‘बसवर्ल्ड इंडिया कॉन्क्लेव 2026’ में बताया कि सड़क परिवहन मंत्रालय पहले ही 1 सितंबर 2025 से संशोधित बस बॉडी कोड लागू कर चुका है।
जांच पूरी होने के बाद रजिस्ट्रेशन की अनुमति
उन्होंने कहा कि अब हर स्लीपर बस का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट ‘वाहन’ पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। नियमों के अनुसार, फायर फाइटिंग सिस्टम, आपातकालीन हथौड़े से निकलने वाले एग्जिट और इमरजेंसी लाइट जैसी सभी सुरक्षा सुविधाओं की जांच पूरी होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी जाएगी।
सुरक्षा और डिजाइन से जुड़े मानक
यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त यूनिट्स में ही किया जा सकेगा। भारत का ‘AIS-052’ बस बॉडी कोड पहले से ही सुरक्षा और डिजाइन से जुड़े मानकों को तय करता है, जिसे अब और सख्ती से लागू किया जा रहा है।
बसों में आग लगने की घटनाएं
सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में बसों में आग लगने की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। इन घटनाओं को देखते हुए यह कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए उठाया गया है।
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