Punjab News : बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब राज्य किसान एवं खेत मजदूर आयोग (PSFFWC) का दौरा किया.
इस दौरे के दौरान प्रोफेसर डॉ. सुखपाल सिंह, चेयरमैन, पंजाब राज्य किसान एवं खेत मजदूर आयोग नवजोत सिंह जरग, चेयरमैन, जीईएनसीओ के साथ प्रोफेसर डॉ. चमकौर सिंह अठवाल की अगुवाई वाले बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में डॉ. फ्लोरिमंड गुनियाट और डॉ. शिशांक, अर्थशास्त्री, डॉ. संदीप धुंधरा, बी.सी.यू., यू.के. शामिल थे. इसके अलावा डॉ. वाई.पी. वर्मा, रजिस्ट्रार तथा डॉ. मनिंदर कौर, पीयू, चंडीगढ़ भी मौजूद थे.
बिजली पर निर्भरता कम करने की पहल
इस बैठक का उद्देश्य राज्य में ऊर्जा उत्पादन के लिए अधिक टिकाऊ मॉडल लाना था.
डॉ. चैम बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा के उचित उपयोग संबंधी विभिन्न मॉडल विकसित करने वाली एक अथॉरिटी हैं, उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने बांग्लादेश में कई परियोजनाएं पायलट आधार पर शुरू की हैं और तकनीकों में बड़े सुधार किए हैं, जिन्हें पंजाब में बहुत कम लागत पर दोहराया जा सकता है. उन्होंने स्मार्ट-एसआईपी मॉडल के बारे में एक पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी, जो कि सामुदायिक आधारित सौर ऊर्जा के उचित उपयोग संबंधी प्रणाली है, जिसे पंजाब में सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है.
सौर ऊर्जा की ओर चरणबद्ध बदलाव की तैयारी
प्रोफेसर डॉ. सुखपाल सिंह ने राज्य के पानी और ऊर्जा परिदृश्य के बारे में भी विस्तार से बताया कि राज्य में प्रतिवर्ष 13.27 बीसीएम पानी की कमी है और एपी ट्यूबवेलों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए हर साल लगभग 8000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, उन्होंने सदन को आगे बताया कि पंजाब राज्य कृषि नीति-2023 में सौर ऊर्जा वाले पंपों की ओर चरणबद्ध बदलाव की सिफारिश की गई है, जिससे न केवल बिजली खर्च कम होंगे, बल्कि राज्य प्रतिवर्ष लगभग 7000 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा करने की स्थिति में आ जाएगा.
सौर ऊर्जा अपनाने में हरियाणा पंजाब से आगे
डॉ. फ्लोरिमंड ने बताया कि हरियाणा ने लगभग 1.80 लाख सोलर पंप लगाए हैं, जबकि पंजाब ने पीएम-कुसुम योजना के तहत केवल 17000 लगाए हैं, उन्होंने बताया कि बांग्लादेश बहुत बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहा है. उदाहरण के लिए, बांग्लादेश में अधिकांश बैटरी पावर ऑटो सौर ऊर्जा के माध्यम से चलाए जा रहे हैं.
बैठक सहमति और सहयोग के साथ समाप्त
विचार-विमर्श के दौरान नवजोत सिंह जरग ने प्रतिनिधिमंडल को अपने गांव में पायलट स्तर पर काम करने की पेशकश की और प्रोफेसर डॉ. सुखपाल सिंह ने होशियारपुर स्थित लामरा-कांगड़ी एमपीसीएस का सुझाव दिया, जो 4 आसपास के गांवों को लगभग 14 सेवाएं प्रदान कर रहा है. प्रोफेसर चैम ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि वे गांवों में अधिक समृद्धि लाने के लिए पीएसएफसी के साथ काम करेंगे. यह बैठक पायलट परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने, संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और पंजाब में स्वच्छ पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के साथ टिकाऊ कृषि के लिए प्रमाणित नीतिगत हस्तक्षेप को बढ़ावा देने पर सहमति के साथ समाप्त हुई. डॉ. आर.एस. बैंस ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और पीएसएफसी के सहयोगियों का धन्यवाद किया.
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