West Asia Crisis : वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और प्रमुख जलमार्गों पर अनिश्चितता के कारण शिपिंग कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों की ओर रुख करना पड़ रहा है. इसका असर अफ्रीका पर भी दिखाई दे रहा है, जो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रैफिक के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है.
हाल के समय में होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर क्षेत्र में अस्थिरता के चलते पारंपरिक समुद्री आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है. इसके कारण जहाज मालिकों ने ऐसे मार्ग अपनाने शुरू किए हैं, जिनमें समुद्री और जमीनी परिवहन का संयोजन शामिल है. खाड़ी देशों तक माल पहुंचाने के लिए नए लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित किए जा रहे हैं.
जेद्दा इस्लामिक पोर्ट बना अहम लॉजिस्टिक हब
लाल सागर के पास स्थित जेद्दा इस्लामिक पोर्ट अब एक महत्वपूर्ण हब बनकर सामने आया है. बड़ी शिपिंग कंपनियां अपने जहाज स्वेज नहर के माध्यम से यहां भेज रही हैं, जहां से सामान आगे ट्रकों के जरिए खाड़ी देशों तक पहुंचाया जा रहा है. हालांकि, इस बढ़े हुए दबाव के कारण पोर्ट पर भीड़ और देरी जैसी समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं.
ओमान और यूएई के बंदरगाहों की भूमिका बढ़ी
इसी बीच ओमान के सोहर और यूएई के खोरफक्कन व फुजैरा जैसे बंदरगाहों का उपयोग भी बढ़ा है, जो सड़क मार्ग से खाड़ी देशों से जुड़े हुए हैं. वहीं, जॉर्डन का अकाबा पोर्ट इराक तक आपूर्ति के लिए एक अहम केंद्र बन गया है, जबकि तुर्की के रास्ते उत्तरी इराक के लिए भी वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया है.
लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं के कारण कई जहाज बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य और स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप मार्ग से यूरोप की ओर जा रहे हैं, जिससे यात्रा समय में वृद्धि हुई है.
इस पूरी स्थिति का प्रभाव वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ नजर आ रहा है. एशिया से यूरोप तक माल पहुंचने में अब अधिक समय लग रहा है, जबकि ईंधन की खपत और जहाजों की संख्या बढ़ने से शिपिंग लागत में भी वृद्धि हुई है.
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