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परमाणु नीति पर बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान आमने-सामने, NPT पद को लेकर विवाद

Iran US Tension : ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात युद्ध जैसी स्थिति तक पहुंचते दिख रहे हैं। इसी बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के उपाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है।

वैश्विक परमाणु नीतियों की समीक्षा

यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में आयोजित NPT के 11वें समीक्षा सम्मेलन के दौरान लिया गया। यह सम्मेलन हर पांच साल में एक बार होता है, जिसमें सदस्य देशों द्वारा संधि के क्रियान्वयन और वैश्विक परमाणु नीतियों की समीक्षा की जाती है।

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे वियतनाम के राजदूत दो हुंग वियेत ने जानकारी दी कि ईरान का नाम गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) समूह की ओर से प्रस्तावित किया गया था। इस समूह में भारत सहित 100 से अधिक देश शामिल हैं।

ईरान पर परमाणु हथियार बनाने के आरोप

हालांकि, इस फैसले पर अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया है। अमेरिकी अधिकारी क्रिस्टोफर येओ ने इसे NPT की विश्वसनीयता के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि ईरान पर लंबे समय से परमाणु हथियार बनाने के प्रयासों के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में उसे महत्वपूर्ण पद देना उचित नहीं है।

अमेरिका खुद कर चुका है परमाणु हथियारों का उपयोग

वहीं ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका खुद परमाणु हथियारों का उपयोग कर चुका है और लगातार अपने हथियार भंडार को बढ़ा रहा है, इसलिए उसे दूसरों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है।

परमाणु ऊर्जा उपयोग की अनुमति देने का प्रावधान

गौरतलब है कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1970 से लागू है और इसका उद्देश्य दुनिया में परमाणु हथियारों के विस्तार को रोकना है। इस संधि के तहत मौजूदा परमाणु शक्ति संपन्न देशों को धीरे-धीरे अपने हथियार कम करने और बाकी देशों को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग की अनुमति देने का प्रावधान है। आज 195 में से 191 देश इस संधि का हिस्सा हैं, जबकि भारत, पाकिस्तान, इजराइल और दक्षिण सूडान इसमें शामिल नहीं हैं। अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस को आधिकारिक परमाणु शक्ति देश माना जाता है।

परमाणु हथियारों में कमी लाने का लक्ष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही संधि का ढांचा मजबूत है, लेकिन परमाणु हथियारों में कमी लाने का लक्ष्य अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। कई देश अपने हथियारों को घटाने के बजाय उन्हें आधुनिक बना रहे हैं, जिससे वैश्विक असंतुलन की स्थिति बनी हुई है।

60% तक बढ़ाने के आरोप

ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। उस पर यूरेनियम संवर्धन को 60% तक बढ़ाने के आरोप भी लगते रहे हैं, जबकि ईरान लगातार यह दावा करता है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

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