
Nepal News : पड़ोसी देश नेपाल में सितम्बर 2025 से भड़के हिंसा में अब तक 76 से ज्यादा लोगों की जाने जा चुकी है। लगभग 2300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। आंदोलनों की अगुवाई युवा कार्यकर्ता कर रहे थे जिनके वजह से इन्हें जेन-जी आंदोलन’ कहा गया। हिंसा के बाद हिंसक प्रदर्शनों के दबाव में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। फिर भी अंतरिम सरकार और उसके नेतृत्व से Gen-Z निराश नजर आ रहे हैं।
हिंसा के दौरान खोया एक पैर
सितम्बर के हिंसा में शामिल मुकेश आवस्ती बताते हैं कि वो ऑस्ट्रेलिया जाकर सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने वाले थे, लेकिन उन्होंने नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया। पर इस दौरान सुरक्षा बलों की गोली लगने से उनकी एक टांग चली गई। 22 वर्षीय आवस्ती की काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी करनी पड़ी। उनका कहना है कि इतने बलिदानों के बाद जो सीमित उपलब्धि मिली है, उसके लिए उन्होंने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है, पर अब उन्हें पछतावा होता है।
क्या थी नई सरकार से अपेक्षा?
आवस्ती का कहना है कि अब मुझे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला गलत लगता है। क्योंकि जिस नई सरकार को हमने खुद चुना, उससे अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं मिल पाया है। आवस्ती के मुताबिक, उन लोगों द्वारा बनाए गए अंतरिम सरकार से अपेक्षा थी कि अब भ्रष्टाचार खत्म होगा, लेकिन वह आज भी जारी है। इसके साथ ही आवस्ती का कहना है कि जिन लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए था, पर ऐसा भी नहीं हुआ।
8 सितंबर 2025 को शुरु हुआ था हिंसा
गौरतलब है कि नेपाल में 8 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों से नाराज प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर संसद में घुसने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने गोलियां चला दीं। अगले ही दिन यह आक्रोश पूरे देश में फैल गया। गुस्साई भीड़ ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय, पुलिस थानों और कई शीर्ष नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया। कई नेताओं को सेना के हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित देश के बाहर निकाला गया था।
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