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NCERT मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश, माफी काफी नहीं

NCERT Case : सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्ट्राचार’ पाठ पर स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने बुधवार को केस दर्ज करने का आदेश दिया था। मामले पर गुरूवार को सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ सुनवाई करेगी।

‘न्यायपालिका में भ्रष्ट्राचार’ से विवाद की शुरूआत

24 फरवरी को एनसीईआरटी की ओर से जारी 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्ट्राचार’ सेक्शन शामिल किया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की। और कहा कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश है। तथा इसके वितरण पर रोक लगाते हुए केस दर्ज करने का आदेश दिया।
मामले में एनसीईआरटी ने बयान जारी करके माफी मांगी और बताया कि यह गलती अनजाने में हुई।

एनसीईआरटी ने बताया कि उसका उद्देश्य संवैधानिक संस्थाओं के बारे में छात्रों को जागरूक करना था, न कि किसी संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाना। विभाग ने विश्वास दिलाया कि किताब में सुधार करके शैक्षणिक सत्र 2026-27 के पहले इसका वितरण किया जाएगा।

आज होगी सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ आज मामले की सुनवाई करेगी। इसके पहले बुधवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी द्वारा मुख्य न्यायाधीश के सामने मुद्दा उठाने के बाद कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। तथा केस दर्ज करने का आदेश दिया था।

न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी को भी न्यायालय को बदनाम करने की इजाजत नहीं है। सीजेआई ने बताया कि संस्था का प्रमुख होने के नाते मैने हमेशा आपने दायित्व का निर्वहन किया है। इसको बदनाम करने की इजाजत किसी भी कीमत पर नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा। इससे कैसे निपटा जाए मुझे अच्छे से पता है।

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