
Jagannath Temple Puri : ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और रहस्यों का ऐसा केंद्र है जो सदियों से लोगों को आकर्षित करता आ रहा है। हाल ही में रत्न भंडार को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है, जिससे इस पवित्र धाम के प्रति जिज्ञासा और बढ़ गई है।
पौराणिक इतिहास जो आज भी जीवित है
मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु के आदेश पर इस मंदिर का निर्माण कराया था। उन्हें स्वप्न में नील माधव की खोज का संदेश मिला था। यही से इस दिव्य धाम की शुरुआत मानी जाती है। एक अन्य कथा के अनुसार, यह स्थान मोक्ष यात्रा और चार धाम की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है।
मंदिर की अनोखी और रहस्यमयी बातें
- हवा के विपरीत लहराता झंडा
मंदिर के शिखर पर लगा झंडा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है। इसे आज भी लोग दिव्य संकेत मानते हैं।
- रोज 200 फीट ऊंचाई पर परंपरा
हर दिन एक पुजारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऊंचे शिखर पर चढ़कर झंडा बदलता है, जिसे बेहद पवित्र परंपरा माना जाता है।
- समुद्र की आवाज गायब हो जाना
मंदिर में प्रवेश करते ही समुद्र की आवाज गायब हो जाती है और बाहर आते ही फिर सुनाई देने लगती है।
- प्रसाद का अनोखा रहस्य
यहां प्रसाद सात मिट्टी के बर्तनों में एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ऊपर वाला बर्तन पहले पक जाता है। साथ ही प्रसाद कभी कम या ज्यादा नहीं होता।
- मंदिर की परछाई नहीं पड़ती
कहा जाता है कि दिन के किसी भी समय मंदिर की छाया जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती।
- लकड़ी की मूर्तियों का रहस्य
यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनी हैं। हर 12 से 19 साल में “नवकलेवर” प्रक्रिया के तहत इन्हें बदला जाता है, जिसमें ब्रह्म पदार्थ को नई मूर्ति में स्थानांतरित किया जाता है।
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