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नक्सल मुक्त पलामू में बदली रणनीति, पुलिस कर रही कैंप-पिकेट की समीक्षा

Jharkhand News : झारखंड के Palamu जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद अब पुलिस अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को नए हालात के अनुसार ढालने की तैयारी शुरू हो गई है।

कई पिकेट हो सकते हैं बंद, कुछ रहेंगे शैडो मोडमें

पुलिस द्वारा की जा रही समीक्षा के तहत कई पुराने पिकेट और कैंप बंद किए जा सकते हैं, जबकि कुछ को शैडो मोड में रखा जाएगा। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।

केंद्र ने 2024 में घोषित किया था नक्सल मुक्त

अप्रैल 2024 में केंद्र सरकार ने पलामू को नक्सल मुक्त घोषित किया था। इसके बाद यहां तैनात Central Reserve Police Force की 134वीं बटालियन को भी वापस बुला लिया गया था, जिससे सुरक्षा ढांचे में बदलाव की जरूरत महसूस हुई।

70 से अधिक कैंपों ने तोड़ा नक्सली नेटवर्क

पलामू रेंज, जिसमें Garhwa और Latehar शामिल हैं, में 70 से ज्यादा कैंप और पिकेट स्थापित किए गए थे। इनकी रणनीतिक तैनाती से माओवादियों के कॉरिडोर को तोड़ने और उनकी सप्लाई लाइन खत्म करने में बड़ी सफलता मिली।

 ‘ऑक्टोपस अभियानसे मिला था बड़ा फायदा

2022 में बूढ़ापहाड़ इलाके में चलाए गए ‘ऑक्टोपस अभियान’ के दौरान कई नए कैंप बनाए गए थे। इस अभियान ने नक्सलियों के प्रभाव को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई।

पिकेट और कैंप रहे नक्सल विरोधी अभियान की रीढ़

पिछले कई वर्षों में पुलिस पिकेट और कैंप नक्सल विरोधी ऑपरेशन का मुख्य आधार रहे हैं। इनके जरिए त्वरित कार्रवाई संभव हुई और किसी भी इलाके में कम समय में ऑपरेशन शुरू करने की क्षमता विकसित हुई।

अब नार्कोटिक्स नेटवर्क पर पुलिस की नजर

नक्सली गतिविधियों के कमजोर पड़ने के बाद अब पुलिस का फोकस बदल रहा है। अफीम और शराब तस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए नार्कोटिक्स रूट पर विशेष निगरानी की योजना बनाई जा रही है।

बदलते हालात के अनुसार नई रणनीति

पुलिस अब क्षेत्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नए खतरों के हिसाब से रणनीति तैयार कर रही है। तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संसाधनों के सही इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

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