धर्म

आज है चैत्र पूर्णिमा, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


Chaitra Purnima 2026 :
हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष स्थान माना जाता है। यह दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसे कई जगह “चैती पूनम” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में दिखाई देता है, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

तिथि और चंद्रोदय का समय

इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा की तिथि 1 अप्रैल सुबह 07:06 बजे से शुरू होकर 2 अप्रैल सुबह 07:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय का समय शाम 06:06 बजे निर्धारित है। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

व्रत और पूजा का महत्व

इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालु भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य कई गुना फल देते हैं।

चार शुभ योगों का विशेष संयोग

इस बार चैत्र पूर्णिमा पर कई शुभ योग बन रहे हैं, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, वृद्धि योग और ध्रुव योग। ये सभी योग सफलता, उन्नति और बाधाओं के नाश के प्रतीक माने जाते हैं। इन योगों में पूजा-अर्चना करने से विशेष लाभ मिलता है।

महत्वपूर्ण मुहूर्त और समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 से 05:25 तक
  • सत्यनारायण पूजा: सुबह 06:11 से 09:18 तक
  • अमृत काल: सुबह 08:48 से 10:28 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:20 तक
  • चंद्र अर्घ्य: शाम 06:39 बजे तक

पूजा विधि कैसे करें

सुबह स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद व्रत रखकर भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा करें। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।

पुण्य कार्यों का महत्व

पूर्णिमा के दिन दान, जप और स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करना बेहद शुभ माना गया है। साथ ही चंद्रमा की रोशनी में कुछ समय बिताना भी लाभकारी बताया गया है।

वैशाख माह की शुरुआत

चैत्र पूर्णिमा के बाद वैशाख माह का आरंभ होता है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने में गंगा स्नान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।

प्रमुख मंत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी
  • अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं
  • हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र

यह पावन दिन श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है, जो जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने का संदेश देता है।

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