Supreme Court On Stray Dogs : आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने संबंधी दिशा-निर्देशों में बदलाव की मांग की गई थी। अदालत ने साफ कहा कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे संवेदनशील इलाकों में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
बढ़ती घटनाओं को नहीं किया जा सकता नज़रअंदाज़
याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड द्वारा जारी SOPs में संशोधन किया जाए, ताकि आवारा कुत्तों को इन जगहों से हटाने के निर्देश वापस लिए जा सकें। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बढ़ती संख्या के लिए बनाएं मजबूत व्यवस्था
कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी फटकार लगाते हुए कहा कि अगर Animal Birth Control नियमों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी राज्य मिलकर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट मामलों से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करें।
चार महीनों में दो लाख डॉग बाइट केस
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कई चिंताजनक आंकड़े भी रखे गए। बताया गया कि राजस्थान के श्रीगंगानगर में सिर्फ एक महीने के भीतर 1,084 लोगों को कुत्तों ने काटा, जबकि तमिलनाडु में पिछले चार महीनों में करीब दो लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए।
लोगों की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती और संस्थागत क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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