EV Battery Life : इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल बैटरी को लेकर होता है। अक्सर यह डर रहता है कि अगर बैटरी खराब हो गई या वारंटी खत्म होने के बाद काम करना बंद कर दे तो क्या होगा। यह चिंता सही भी है, क्योंकि इलेक्ट्रिक कार में बैटरी सबसे महंगा और सबसे अहम हिस्सा होती है। इसकी कीमत कुल गाड़ी की कीमत का लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक होती है।
कैसे किया गया कार का इस्तेमाल
इसी वजह से EV खरीदने से पहले बैटरी की लाइफ और उसके रिप्लेसमेंट खर्च को समझना जरूरी है। आमतौर पर इलेक्ट्रिक कार की बैटरी 10 से 15 साल तक चल सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि कार का इस्तेमाल कैसे किया गया है, चार्जिंग पैटर्न क्या है और गाड़ी किस तरह चलाई गई है।
नई बैटरी 300 किलोमीटर की देती है रेंज
भारत में टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां अपनी कई इलेक्ट्रिक कारों पर बैटरी के लिए 8 से 10 साल या 1.5 से 2 लाख किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं। कुछ मामलों में लाइफटाइम वारंटी भी मिलती है, लेकिन उसके लिए कुछ शर्तें होती हैं। वारंटी खत्म होने के बाद भी बैटरी पूरी तरह खराब नहीं होती, बल्कि उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर नई बैटरी 300 किलोमीटर की रेंज देती है, तो 10 साल बाद यह लगभग 220 से 240 किलोमीटर तक रह सकती है।
कार की कुल कीमत का 40 से 50 प्रतिशत
अगर वारंटी खत्म होने के बाद बैटरी में बड़ी खराबी आती है और उसे बदलना पड़े, तो खर्च काफी ज्यादा हो सकता है। अनुमान के मुताबिक बैटरी बदलने का खर्च कार की कुल कीमत का 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकता है। यानी 10 लाख रुपये की कार में बैटरी बदलने पर लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है।
पूरी बैटरी बदलने की जरूरत नहीं
हालांकि राहत की बात यह है कि हर बार पूरी बैटरी बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इलेक्ट्रिक कार की बैटरी कई छोटे-छोटे मॉड्यूल और सेल्स से बनी होती है। कई बार सिर्फ कुछ खराब सेल्स या मॉड्यूल बदलकर ही बैटरी को ठीक किया जा सकता है, जिससे काफी पैसा बच जाता है।
ये भी पढ़ें- दूसरी बार मां बनने जा रहीं Deepika Padukone, रणवीर सिंह के घर गूंजेगी किलकारी
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप








