Agriculture : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के युवा किसान ने गर्मी के मौसम में बढ़ती हरी सब्जियों की मांग को पहचानते हुए पालक की खेती को अपनाया और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। विकास बताते हैं कि वे ‘किसान केशरी’ किस्म के बीज का उपयोग करते हैं, जो केवल 15-20 दिन में तैयार हो जाती है। इस किस्म की खासियत यह है कि जड़ काली नहीं पड़ती, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
जुताई कर बनाई जाती हैं क्यारियां
खेती की प्रक्रिया में विकास बताते हैं कि सबसे पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी की जाती है। खेत को वीडर से जुताई कर क्यारियां बनाई जाती हैं। बीज बोने के बाद तुरंत सिंचाई की जाती है और गर्मी में फसल को रोजाना पानी देना जरूरी होता है।
बेहतर उत्पादन के बेहतर खाद
पालक की फसल में कैटरपिलर (इल्ली) का खतरा रहता है, इसलिए नियमित निगरानी जरूरी है। बेहतर उत्पादन के लिए नाइट्रोजन युक्त खाद और 100 ग्राम NPK घोल का स्प्रे किया जाता है।
उच्च मांग के कारण लाभदायक विकल्प
कम समय में तैयार होने वाली यह फसल, कम लागत और उच्च मांग के कारण किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है। विकास सोनकर जैसे युवा किसान आधुनिक तकनीकों और मेहनत के जरिए न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहे हैं।
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