केदारनाथ धाम में अब लाइन मेें लगकर ही श्रद्धालु कर सकेंगे बाबा केदार के दर्शन, जानें क्यों?

Kedarnath Dham

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) पहुंचने वाले यात्रियों को जल्द से जल्द बाबा केदार के दर्शन कराने के लिये प्रशासन ने क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू कर दिया है। साथ ही मंदिर के दोनों द्वारों पर पक्की बैरेकेडिंग करवा दी है। बैरेकेडिंग होने से कोई भी यात्री न तो लाइन तोड़ेगा और न कोई दसूरा व्यक्ति लाइन में घुसेगा। इसके साथ ही मंदिर के वीआईपी गेट से भी कोई अंदर नहीं घुसेगा।

मंदिर के दोनों द्वारों पर करवा दी गई पक्की बैरेकेडिंग

केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मात्र पांच दिन की ही यात्रा में 90 हजार से अधिक यात्री केदारनाथ पहुंच चुके हैं। यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण केदारनाथ मेेेें बाबा के दर्शनों के लिये एक किमी लंबी लाइन लग रही है। साथ ही मुख्य द्वार पर भक्तों की भारी भीड़ जमा हो रही है। बैरेकेडिंग न होने के कारण बार-बार लाइन टूट रही थी और घंटों तक लाइन आगे नहीं बढ़ पा रही थी। कई बार यात्री बीच में घुस रहे थे, लेकिन प्रशासन ने अब मंदिर के मुख्य द्वार व वीआईपी द्वार पर पक्की बैरेकेडिंग कर दी है। जो भी यात्री अब धाम में पहुंचेगा, वह लाइन में लगकर ही दर्शन करेगा।

मात्र 5 दिन की ही यात्रा में पहुंच चुके 90 हजार से अधिक यात्री केदारनाथ

बैरेकेडिंग लगने से यात्रियों को बाबा केदार के दर्शन शीघ्र हो रहे हैं। एक किमी दूर हेलीपैड तक दर्शनों के लिये लग रही लाइन भी शीघ्र समाप्त हो रही है। मंदिर के वीआईपी गेट पर भी प्रशासन ने बैरेकेडिंग करवा दी है। यहां पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। अब कोई भी वीआईपी के नाम पर शीघ्र बाबा के दर्शन करने के लिये अंदर नहीं जा सकेगा।

मंदिर के वीआईपी गेट पर भी प्रशासन ने करवा दी बैरेकेडिंग

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि हमारा प्रयास है कि भक्तों को बाबा केदार के दर्शन त्वरित गति से अधिक से अधिक संख्या में कराये जायें। इसके लिये क्यू मैनेजमेंट का होना जरूरी है और जो भी भक्त दर्शन करने के लिये आ रहे हैं, उनके लिये बैरेकेडिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि सभी भक्त लाइन में लगकर दर्शन करें। वीआईपी गेट पर भी अत्यधिक भीड़ जमा हो जाती थी। यहां भी बैरेकेडिंग की गई है।

Share This News

Leave a Reply

Your email address will not be published.