Buddha Purnima 2026 : बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सारनाथ में आयोजित ‘बौद्ध महोत्सव’ में आस्था, संस्कृति और ज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और अन्य संगठनों के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश से आए एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर बुद्ध अस्थि धातु के दर्शन किए।
चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन
मूलगंध कुटी विहार में श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन कर आस्था प्रकट की। इस दौरान ‘विश्व शांति के लिए तथागत बुद्ध’ विषय पर निबंध, चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न स्कूलों के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
बुद्ध के उपदेशों को अपनाने पर दिया जोर
प्रतियोगिताओं में विजेताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के साथ-साथ सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में धम्म देशना, विपश्यना और परिचर्चा का भी आयोजन हुआ, जिसमें वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया। पूरे दिन श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई, जिससे सेवा और करुणा का संदेश और मजबूत हुआ।
महापरिनिर्वाण की स्मृति का पावन अवसर
इस अवसर पर कई बौद्ध भिक्षु, शोधकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज भी विश्व शांति, सहिष्णुता और करुणा के लिए बेहद प्रासंगिक है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति का पावन अवसर है, जो समाज को शांति और मानवता का मार्ग दिखाता है।
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