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पीएम मोदी ने की ईरान के राष्ट्रपति से बात, बढ़ते तनाव और बिगड़ती स्थिति पर जताई चिंता  

Middle East Conflict : पश्चिम एशिया मे युद्ध का सिलसिला जारी है। तनाव आए दिन गहराता ही जा रहा है। इस बीच जारी युद्ध के दौरान पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेशेजकियान से फोन पर बातचीत की है। पीएम ने क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति और नागरिकों की मौत सहित अन्य हो रहे नुकसान पर चिंता व्यक्त की।  

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सामान और ऊर्जा के निर्बाध परिवहन को बनाए रखना है। इस बात की जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति से पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर चर्चा की औ नागरिक जीवन को हो रहे नुकसान पर चिंता व्यक्त की।

ऊर्जा आपूर्ति और जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों की बातचीत में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता जैसे अहम विषय प्रमुख रहे। हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यापारिक जहाजों पर हुई घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते इस क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की थी ईरान से बात

इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क कर जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बीते कुछ समय में दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है।

इसी क्रम में विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी ईरानी दूतावास पहुंचे थे, जहां उन्होंने हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में संवेदना व्यक्त की।

ईरान में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस समय ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें छात्र, समुद्री कर्मी, पेशेवर, व्यापारी और तीर्थयात्री शामिल हैं। सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

गौरतलब है कि पिछले महीने क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति और संवेदनशील हो गई है। संघर्ष की घटनाओं के चलते क्षेत्रीय माहौल पर असर पड़ा है और भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

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