Government Hospitals : सरकारी अस्पतालों में मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं की लगातार मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों (CMO), अस्पताल निदेशकों और अधीक्षकों को नए सिरे से अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
स्वास्थ्य महानिदेशक पवन कुमार अरुण ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों, अस्पताल निदेशकों और अधीक्षकों को पत्र भेजकर अस्पताल परिसरों को आवारा कुत्तों और पशुओं से मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि वे स्थानीय नगर निकायों के साथ समन्वय बनाकर नियमित अभियान चलाएं, ताकि अस्पताल परिसर सुरक्षित बने रहें.
सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत
निर्देशों में अस्पतालों के मुख्य प्रवेश द्वार, चाहरदीवारी और बाड़ जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवारा कुत्ते और अन्य पशु अस्पताल परिसर में प्रवेश न कर सकें और मरीजों व तीमारदारों की सुरक्षा बनी रहे.
स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं. ताकि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते के काटने की घटना का सामना करना पड़े तो उसे बिना देरी के इलाज मिल सके. विभाग ने इसे अस्पतालों की अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा बनाने को कहा है.
पहले भी जारी हुए थे निर्देश
जनवरी में तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने भी इस संबंध में सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए थे. उस समय अस्पतालों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई थी, लेकिन कई जगहों पर आवारा कुत्तों और पशुओं की समस्या बनी रही. इसी वजह से शासन ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है.
स्वास्थ्य महानिदेशक ने साफ कहा है कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी. सभी अधिकारियों को निर्देशों का जिम्मेदारी से पालन करना होगा. यदि किसी अस्पताल में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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