
Saket Building Collapse : दक्षिण दिल्ली के साकेत के पास सैदुल्लाजाब इलाके में शनिवार शाम एक अवैध छह मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय इमारत में कई लोग मौजूद थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मलबे में दबने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। वहीं अन्य कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है और राहत-बचाव कार्य जारी है।
धमाके जैसी आवाज से दहल उठा इलाका
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत गिरते ही जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धूल और मलबे के गुबार से भर गया। आसपास मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इमारत के एक हिस्से में निर्माण कार्य भी चल रहा था।
मृतक की पहचान, कई घायल अस्पताल में भर्ती
हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान 26 वर्षीय रवि के रूप में हुई है। वहीं, कई घायल लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घायलों में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और बिहार के निवासी शामिल हैं। सभी का उपचार जारी है।
सातवीं मंजिल के निर्माण के दौरान हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इमारत पर सातवीं मंजिल की छत डालने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान पूरी संरचना असंतुलित होकर ढह गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इमारत का निर्माण नियमों के विपरीत किया जा रहा था।
मलबे से 15 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बचाव दल ने देर रात तक मलबे से 15 लोगों को बाहर निकाल लिया था। इनमें 11 पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। घायलों को मैक्स, एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है।
60 से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका
स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के अनुसार मलबे के नीचे अभी भी 60 से ज्यादा लोगों के दबे होने की संभावना है। इसी आशंका को देखते हुए एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही हैं।
घायलों के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल ने बताया कि घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने के लिए सैदुल्लाजाब से एम्स तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। एंबुलेंस को बिना किसी बाधा के अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई ताकि घायलों को जल्द चिकित्सा सहायता मिल सके।
कैंटीन पर गिरा मलबा, बढ़ी चिंता
अधिकारियों के मुताबिक पोर्टा केबिन संरचना पर एक कैंटीन संचालित की जा रही थी, जिस पर इमारत का मलबा गिरा। आशंका है कि उस हिस्से में मौजूद कुछ लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। बचाव दल विशेष उपकरणों की मदद से उस हिस्से में तलाश अभियान चला रहा है।
परिजनों ने उठाए प्रशासन पर सवाल
मौके पर मौजूद कुछ परिजनों ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें अपने परिजनों की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इमारत के निर्माण को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
सप्ताहांत होने से इलाके में थी अधिक भीड़
स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार सप्ताहांत होने के कारण इलाके में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ थी। हालांकि दफ्तर बंद होने के कारण इमारत के भीतर लोगों की संख्या कम हो सकती थी, फिर भी हादसे के समय कई लोग वहां मौजूद थे।
देर रात तक जारी रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
राहत एवं बचाव कार्य को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। क्रेन, जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। साथ ही इमारत के निर्माण और हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।
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