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BLA का दावा- ग्वादर में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप पर आत्मघाती हमला, 30 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा

Gwadar attack : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जीवानी क्षेत्र में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के एक कैंप पर हमले का दावा सामने आया है. बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा है कि उसके लड़ाकों ने कैंप को निशाना बनाया, जिसमें संगठन के अनुसार 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए.

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. पाकिस्तान की सेना, कोस्ट गार्ड्स या अन्य सरकारी एजेंसियों की ओर से घटना और कथित हताहतों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

BLA ने ली जिम्मेदारी

BLA ने अपने बयान में कहा है कि यह हमला ग्वादर जिले के जीवानी इलाके के पनवान स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर उसकी विशेष इकाई “मजीद ब्रिगेड” ने किया. संगठन के अनुसार, शुक्रवार शाम लगभग 6:32 बजे (स्थानीय समय) एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे ट्रक को कैंप से टकरा दिया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ.

संगठन का दावा है कि इस हमले में 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.

पिछले 10 दिनों में 23 अभियानों का दावा

BLA ने यह भी दावा किया है कि पिछले 10 दिनों के दौरान उसने बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ 23 अभियान चलाए हैं. संगठन के अनुसार, इन अभियानों में 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए.

BLA के प्रवक्ता जियंद बलोच ने कहा कि ये अभियान सुरक्षा बलों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाकर चलाए गए, उन्होंने दावा किया कि संगठन की सशस्त्र गतिविधियां तब तक जारी रहेंगी, जब तक वह अपने घोषित लक्ष्य “बलूचिस्तान की स्वतंत्रता” को हासिल नहीं कर लेता.

इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की सेना की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

लंदन में बलूच कार्यकर्ता का विरोध प्रदर्शन

बलूच कार्यकर्ता आओमार करीम ने लंदन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भूख हड़ताल शुरू की है.

करीम का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान में बलूच राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर कथित दमन के विरोध में यह कदम उठाया है. उनके अनुसार, इस विरोध का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान बलूचिस्तान की स्थिति और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर आकर्षित करना है.

इस मामले में भी संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

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