
BARC TRP Suspension : भारत में टीवी चैनलों को TRP, GRP प्रदान करने वाली संस्था Broadcast Audience Research Council, BARC ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सभी टीवी चैनलों की रेटिंग्स पर तत्काल प्रभाव से रोक दिया है. 2 जुलाई को रात 12 बजकर 2 मिनट पर BARC ने सभी टीवी चैनलों और ब्रॉडकास्टरों को ई-मेल जारी करके इसकी इत्तला की.

क्यों रोकी गई BARC की रेटिंग्स?
रेटिंग्स रोकने के पीछे की असली वजह बना एक ई-मेल जो सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार समेत कई ज़िम्मेदार लोगों तथा एजेंसियों को लिखा गया था और BARC के द्वारा बरती जा रही गड़बड़ियों को सबूत के साथ उजागर किया गया था. 24 जून 2026 को दोपहर 01 बजकर 18 मिनट पर ये ई-मेल “हिन्दी ख़बर”, “लिविंग इंडिया” और “टब्बर हिट्स” सैटेलाइट टीवी चैनलों के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर इन चीफ अतुल अग्रवाल ने लिखा गया था. (ई-मेल का स्क्रीन शॉट संलग्न)
अतुल अग्रवाल ने अपने ईमेल में लिखा था कि…
“अमेरिका, इज़रायल तथा ईरान के मध्य तनाव पश्चात युद्ध आरंभ होने और भारतीय न्यूज़ चैनलों पर नकारात्मक ख़बरों के प्रचार-प्रसार को हतोत्साहित करने के जनहितकारी उद्देश्य के कारण, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा मार्च 2026 में समाचार चैनलों की टेलीविजन रेटिंग्स (TRP) के प्रकाशन / प्रसारण पर रोक लगाने तथा उन्हें स्थगित करने संबंधी निर्देश जारी किए गए थे। उक्त निर्देशों के अनुपालन में BARC के द्वारा अधिकांश समाचार चैनलों की टीआरपी रेटिंग्स का प्रकाशन बंद कर दिया गया था।
परंतु अत्यंत आश्चर्य एवं घोर चिंता का विषय ये है कि पंजाब से संचालित समाचार चैनल “चढ़दी कला टाइम टीवी” की टीआरपी रेटिंग्स BARC के द्वारा रोकी नहीं की गई बल्कि निरंतर जारी रखी गईं, जबकि अन्य समाचार चैनलों, जिनमें हमारा चैनल “लिविंग इंडिया न्यूज़” भी शामिल है, की रेटिंग्स रोक दी गईं थीं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि TRAI द्वारा प्रकाशित 31 मार्च 2026 तक की FTA (Free-to-Air) चैनलों की सूची में “CHARDIKALA TIME TV” के सामने स्पष्ट रूप से “News and Current Affairs” श्रेणी दर्ज है।”

इसके आगे भी अतुल अग्रवाल ने कई ठोस तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए BARC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और BARC के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चुनौती दी थी. (ई-मेल के स्क्रीन शॉट संलग्न हैं) अतुल अग्रवाल ने लिखा था कि… “यदि निर्धारित 5 दिनों की अवधि में सारगर्भित, स्पष्ट तथा संतोषजनक प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो हमारी कंपनी BPL MEDIA LIMITED अपने वैधानिक, सामाजिक तथा व्यावसायिक अधिकारों के संरक्षण के लिए, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, संबंधित नियामक संस्थाओं तथा सक्षम न्यायिक मंचों के समक्ष उचित कानूनी कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए विवश होगी, जिसकी समस्त आर्थिक भरपाई तथा अन्य प्रकार की जिम्मेदारी BARC पर आयातित होगी।”

शिकायत के बाद BARC ने क्या किया?
इसके बाद BARC के चीफ ऑफ एनालिटिक्स एंड पार्टनरशिप्स आदित्य पाठक और वाइस प्रेसिडेंट पार्टनरशिप्स अमित अरोड़ा ने अतुल अग्रवाल के साथ करीब एक घन्टे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की. इसके 2 दिन बाद दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में BARC के सीईओ नकुल चोपड़ा से अतुल अग्रवाल की मुलाकात करवाई गई. 2 घंटों से ज्यादा की मुलाकात में BARC के सर्वोच्च अफसर ने अपना पक्ष स्पष्ट किया और पूरे मान-सम्मान के साथ, बिना शर्त BARC की गलती को स्वीकार भी किया. BARC के इन उच्चाधिकारियों ने अतुल अग्रवाल को धन्यवाद देते हुए भरोसा दिलाया कि गंभीर प्रकृति की इस गलती की जांच करवाई जाएगी, दोष साबित होने पर कड़ी सज़ा दिलवाई जाएगी और उन्हे बाकायदा लिखित रूप में सूचित भी किया जाएगा.
सूचना प्रसारण मंत्रालय ने क्या किया?
मालूम हुआ है कि इसके पश्चात भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय ने भी अतुल अग्रवाल के ई-मेल को गंभारता से लेते हुए, BARC से जवाब तलब किया था. चौतरफा आलोचनाओं और कानूनी फजीहतों में उलझने तथा व्यापक छीछालेदर के डर से BARC INDIA ने आनन-फानन में सभी टीवी चैनलों की TRP रेटिंग्स को रोक देने में ही भलाई समझी है.
6-7 न्यूज़ चैनल और हैं जिन्हे BARC ने फायदा पहुंचाया: अतुल अग्रवाल
इस बारे में अतुल अग्रवाल ने कहा है कि फरवरी 2026 में भारत सरकार के केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने BARC को उन सभी टीवी चैनलों की TRP रोकने का आदेश जारी किया था, जिनका लाइसेंस न्यूज़ कैटेगरी का है और उसी पर ही वो संचालित किए जा रहे हैं, मगर BARC की तरफ से, कथित सांठ-गांठ, सेटिंग-गेटिंग अथवा गुप्त मंशा एवं लाभ आदि के वशीभूत होकर भारत सरकार के आदेशों की स्पष्ट उल्लंघना की है. पंजाब से संचालित ‘चढ़दी कला टाइम टीवी’ के अलावा 6-7 न्यूज़ चैनल और भी हैं जिनकी TRP बाकायदा जारी रखी गई है और BARC ने उन्हे चुनिन्दा तथा अनैतिक तौर पर फायदा पहुंचाया.
BARC पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
गौरतलब है कि ये पहला मौका नहीं है, इसके पहले भी रिपब्लिक भारत और अन्य मीडिया समूहों के साथ सांठ-गांठ तथा उन्हे फायदा पहुंचाने के आरोपों में BARC घिरा रहा है और उसके वरिष्ठ पदाधिकारियों को जेल तक जाना पड़ चुका है. अब अतुल अग्रवाल के द्वारा उजागर की गई BARC की गलती से उसके अस्तित्व, कार्यप्रणाली और मोनोपोली से उपजी मनमर्जी जैसे गंभीर सवाल उठ खड़े हुए है. अब देखना है कि आने वाले समय में ये विवाद क्या मोड़ लेता है.
ये भी पढ़ें – मोदी सरकार के लिए पूरा देश प्रयोगशाला, लोगों पर जबरदस्ती थोप रही 20 फीसद इथेनॉल मिला पेट्रोल- केजरीवाल
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप









