
Akhilesh Yadav : लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने परीक्षा प्रणाली, छात्रों के आंदोलन और कथित राम मंदिर चंदा गड़बड़ी का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
पेपर लीक को राम मंदिर चंदे के मुद्दे से जोड़ा
बहस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जिन लोगों से राम मंदिर के चंदे की सुरक्षा नहीं हो सकी, वे देश की परीक्षा प्रणाली को भी सुरक्षित नहीं रख सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण करने में विफल रही है।
‘सरकार झुकती है, लेकिन झुकाने वाला चाहिए‘
अखिलेश यादव ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों के बाद सरकार को अपनी मांगें माननी पड़ीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार दावा करती थी कि वह किसी के सामने नहीं झुकती, लेकिन जब जनता का दबाव बढ़ता है तो उसे फैसले बदलने पड़ते हैं।
छात्र आंदोलन को बताया लोकतंत्र की जीत
सपा प्रमुख ने छात्र आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि यह ऐसा आंदोलन था, जिसे छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों का भी समर्थन मिला। उनके अनुसार, छात्रों के लगातार विरोध के कारण सरकार को प्रदर्शन की अनुमति देनी पड़ी, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की जीत है।
भर्ती प्रक्रिया और एनटीए पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को लेकर युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस तरह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर सवाल उठे हैं, उसी तरह सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भर्ती प्रक्रियाओं में दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
‘प्रधानमंत्री को बचाने के लिए मंत्री हटाया गया‘
अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक दबाव के चलते शिक्षा मंत्री को हटाया। उनके मुताबिक, यह फैसला सरकार की जवाबदेही से बचने की कोशिश का हिस्सा था।
दिल्ली में छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी घेरा
अखिलेश यादव ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जिस तरह बल प्रयोग किया गया, उसने उन्हें आपातकाल जैसे हालात की याद दिला दी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ सख्ती से पेश आया गया।
नए कानून की प्रभावशीलता पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून ला चुकी है, लेकिन घटनाएं नहीं रुकीं। ऐसे में अब उसी कानून में संशोधन की जरूरत पड़ना इस बात का संकेत है कि पहले की व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी।
सियासी बयान पर तेज हो सकती है बहस
लोकसभा में दिए गए अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू होने की संभावना है। जहां विपक्ष सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं इस मुद्दे पर सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया भी अहम मानी जा रही है।
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