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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, जांच के लिए नई SIT गठित

Ram Mandir Donation Theft Case : उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच को लेकर अपना पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए नई एसआईटी का गठन कर दिया गया है।

वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई SIT की जिम्मेदारी

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एसआईटी की कमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई है। लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस को जांच टीम का प्रमुख बनाया गया है।

तीन सदस्यीय टीम में शामिल हैं ये अधिकारी

नई गठित एसआईटी में आईजी किरण एस के अलावा अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर को सदस्य बनाया गया है। अदालत को बताया गया कि टीम मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।

वित्तीय जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल करने का सुझाव

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं, इसलिए जांच टीम में फोरेंसिक ऑडिट का अनुभव रखने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी शामिल किया जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के इस सुझाव पर सहमति जताई और एसआईटी में ऑडिटर को शामिल करने का आश्वासन दिया।

तेज, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस समय अदालत का मुख्य उद्देश्य मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने एसआईटी को चल रही जांच की प्रगति रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया और कहा कि जांच तेज, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए।

रसीदों को सार्वजनिक करने की याचिकाकर्ता की मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि राम मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले चढ़ावे की सभी रसीदों को क्षेत्रवार वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मांग किसी विरोध के उद्देश्य से नहीं बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।

सरकार ने कहा- मामले को सनसनीखेज न बनाया जाए

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे अनावश्यक रूप से सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत के सामने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने की बात रखी।

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