ऑटोलाइफ़स्टाइल

E20 बनाम आम जनता: माइलेज 30% तक कम होने का दावा, आखिर क्या है माजरा

E20 Fuel Policy : भारत में E20 (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) फ्यूल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर कई वाहन मालिकों का कहना है कि इस फ्यूल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों का माइलेज पहले की तुलना में 10 से 30 प्रतिशत तक कम हो गया है। साथ ही कुछ मामलों में इंजन की परफॉर्मेंस गिरने और तकनीकी दिक्कतें आने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

सरकार ने दावों को किया खारिज

लोगों का आरोप है कि पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण के कारण पुराने वाहनों में फ्यूल सिस्टम, रबर पार्ट्स और इंजन कंपोनेंट्स पर असर पड़ रहा है। हालांकि, सरकार इन दावों को खारिज करते हुए कह रही है कि E20 फ्यूल पूरी तरह सुरक्षित है और इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता।

E20 को बिना पर्याप्त तैयारी किया लागू

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में 2023 से पहले बनी अधिकतर गाड़ियां E10 या सामान्य पेट्रोल के अनुसार डिजाइन की गई थीं। इसी वजह से कई वाहन मालिकों का मानना है कि E20 को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा इथेनॉल फ्यूल से हुए नुकसान के क्लेम पर सवाल उठाए गए, हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी प्रतिबंध की बात सही नहीं है।

विदेशों पर निर्भरता हो रही कम

इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे जल्दबाजी में लागू की गई नीति बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के लिए जरूरी है। सरकार के अनुसार इथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है और गन्ना व मक्का किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।

दूरी तक वाहनों का किया गया परीक्षण

सरकारी दावे के मुताबिक, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा किए गए परीक्षणों में 1 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तक वाहनों पर परीक्षण किया गया है, जिसमें किसी बड़े इंजन फेलियर की पुष्टि नहीं हुई है।

E85 फ्यूल की बढ़ रही उपलब्धता

इधर, कुछ ऑटो कंपनियों ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी बाजार में उतारना शुरू कर दिया है, जो अधिक इथेनॉल मिश्रण पर चलने में सक्षम हैं। साथ ही कई शहरों में E85 फ्यूल की उपलब्धता भी बढ़ रही है। इस पूरे विवाद के बीच अब E20 से आगे E30 और E85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी चर्चा तेज हो गई है, जिससे आने वाले समय में भारत की ईंधन नीति और ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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