
Jharkhand News : झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। अदालत ने पुलिसकर्मियों को एसीपी लाभ देने और सहायक आचार्य नियुक्ति से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
एसीपी लाभ मामले में चार सप्ताह में अनुपालन का आदेश
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। यह मामला पुलिसकर्मियों को एसीपी (Assured Career Progression) लाभ देने से जुड़ा है।
अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि पूर्व में दिए गए आदेश का चार सप्ताह के भीतर पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो डीजीपी को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर कारण बताना होगा।
गौरतलब है कि एकल पीठ ने पहले ही पुलिसकर्मियों को एसीपी लाभ देने का निर्देश दिया था, लेकिन अनुपालन न होने पर यह मामला अवमानना याचिका के रूप में अदालत के सामने आया।
सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में JSSC को फटकार
दूसरे मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई, जिसमें सहायक आचार्य (Assistant Teacher) नियुक्ति से जुड़ा विवाद शामिल था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उसे जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित पद पर एक सीट आरक्षित रखने का आदेश भी जारी किया।
याचिकाकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
यह मामला विनोद कुमार साहू की याचिका से जुड़ा है। उनके अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पास दो टीईटी प्रमाणपत्र हैं। वर्ष 2013 में उन्होंने 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे, जबकि 2016 के टीईटी में उनके अंक 60 प्रतिशत से कम थे।
आरोप है कि JSSC ने 2016 के प्रमाणपत्र को आधार बनाकर दस्तावेज सत्यापन के बावजूद उन्हें नियुक्ति से वंचित कर दिया। वहीं, याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि टीईटी प्रमाणपत्र की वैधता पहले सीमित थी, जिसे वर्ष 2022 में आजीवन मान्य कर दिया गया। इसके बावजूद, अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
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