फटाफट पढ़ें:
- इंदौर में दूषित पानी से मौतें
- तीन साल पुरानी शिकायत सामने आई
- अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया
- 12 मौतें पक्की, घर की जल्द शामिल
- जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से लोगों की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया से बातचीत में भागीरथपुरा के कमल बाघेला ने प्रशासन और सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से सिस्टम की लापरवाही का परिणाम है.
कमल बाघेला ने बताया कि उन्होंने तीन साल पहले ही दूषित पानी की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. उस समय भी इलाके में पानी गंदा और बदबूदार था. लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. बीजेपी पार्षद ने आगे कहा कि सिर्फ मौखिक ही नहीं, बल्कि करीब छह महीने पहले उन्होंने लिखित में भी संबंधित विभागों को शिकायत दी थी. शिकायत में साफ तौर पर चेतावनी दी गई थी कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं.
कमल बाघेला ने कार्रवाई से असंतोष जताया
कमल बाघेला ने कहा कि अब तक जो कार्रवाई की गई है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से लोगों की जान गई, उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस मामले में उनकी खुद की कोई जिम्मेदारी बनती है, तो उन पर भी कार्रवाई की जाए.
घर की मौतें जल्द आंकड़ों में शामिल
वहीं, मौतों की सख्या को लेकर चल रही कन्फ्यूजन पर कमल बाघेला ने स्थिति सपष्ट की. उन्होंने कहा कि अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. जिनकी मौत अस्पताल के बजाय घर पर हुई, उन्हें अभी तक आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया था. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी मौतों को जल्द ही आधिकारिक आंकड़ों में शामिल किया जाएगा.
बीजेपी पार्षद ने आशंका जताई कि सप्लाई किए जा रहे पानी में किसी भी तरह का केमिकल मिला हो सकता है. इसी वजह से लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
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