West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि 60 विधायक उनके साथ हैं। समर्थक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर उन्हें विधायक दल का नेता चुना है।
बागी गुट की ओर से दिए गए प्रस्ताव
बताया जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष ने बागी गुट की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर कार्रवाई करते हुए नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। हालांकि इस गुट ने पार्टी अध्यक्ष के रूप में ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाया है, लेकिन संगठन और विधायक दल से जुड़े कुछ फैसलों पर असहमति जताई है।
अनुमति के बिना इस्तेमाल किए हस्ताक्षर
विवाद की शुरुआत उस प्रस्ताव से हुई जिसमें विधायक दल के नेतृत्व से जुड़ा निर्णय विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि उस दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किए गए। शिकायत सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने संबंधित विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन से बाहर कर दिया।
नए सिरे से किया जाएगा पुनर्गठन
इस बीच बढ़ते आंतरिक विवाद के बीच ममता बनर्जी ने राज्यभर की पार्टी समितियों और विभिन्न फ्रंटल संगठनों को भंग करने का फैसला लिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा के बाद नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा।
TMC के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत
बागी विधायकों का आरोप है कि उन्होंने केवल कथित फर्जी हस्ताक्षरों के मामले को उठाया था, लेकिन इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं पार्टी की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासन और संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को TMC के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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