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कोर्ट का बड़ा झटका: नितेश राणे को ‘कीचड़ कांड’ में एक महीने की सजा

Maharashtra News : महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में है. सिंधुदुर्ग की एक अदालत ने बीजेपी नेता और राज्य के मंत्री नितेश राणे को 2019 में एनएचएआई इंजीनियर से जुड़े एक प्रकरण में दोषी करार दिया है. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग कानून बनाने की जिम्मेदारी निभाते हैं, उन्हें खुद कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए.

हालांकि सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने राणे को राहत देते हुए उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है, ताकि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकें. इसी मामले में शामिल अन्य 29 लोगों को अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है.

2019 में कंकावली में इंजीनियर से जुड़ा विवाद

यह घटना साल 2019 की बताई जाती है, जब नितेश राणे कांग्रेस में थे. उस समय मुंबई-गोवा हाईवे के निर्माण कार्य को लेकर उन्होंने कंकावली के पास एक पुल पर एनएचएआई के उप-मंडल अभियंता प्रकाश शेडेकर को बुलाया था. आरोप है कि वहां उनके समर्थकों के साथ मिलकर इंजीनियर पर कीचड़ और गंदा पानी फेंका गया और उन्हें कीचड़ में चलने के लिए मजबूर किया गया.

अदालत का फैसला और आरोपियों की स्थिति

इस मामले में कुल 30 लोगों के खिलाफ दंगा, सरकारी कर्मचारी को काम से रोकने, धमकी देने और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में केस दर्ज हुआ था. सुनवाई के बाद अदालत ने नितेश राणे को भारतीय दंड संहिता की धारा 504 के तहत दोषी पाया और उन्हें एक महीने की कैद तथा एक लाख रुपये का जुर्माना सुनाया, जिसमें से 50 हजार रुपये पीड़ित इंजीनियर को मुआवजे के तौर पर दिए जाने हैं.

फिलहाल, अदालत के आदेश के बाद सभी आरोपियों की कानूनी स्थिति अलग-अलग हो गई है. जहां राणे को राहत मिली है, वहीं अन्य को बरी कर दिया गया है.

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