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वंदे भारत vs हाइड्रोजन ट्रेन, जानें स्पीड, डिजाइन और टेक्नोलॉजी में कौन है सबसे बेस्ट

Vande Bharat vs Hydrogen Train : भारतीय रेलवे अपनी तकनीक को लगातार उन्नत कर रहा है और यह प्रयास केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। चाहे इलेक्ट्रिफाइड रेलवे ट्रैक हों या ग्रीन कॉरिडोर, रेलवे हर प्रकार के ट्रैक के लिए उपयुक्त और आधुनिक ट्रेनें चला रहा है। हाल ही में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की गई, जो तकनीकी उन्नति और पर्यावरण के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

धुआं नहीं बल्कि केवल पानी की भाप

हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है, जिसमें हाइड्रोजन को बिजली में बदला जाता है और इसके द्वारा ट्रेन की मोटर को पावर मिलती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त है; धुआं नहीं बल्कि केवल पानी की भाप उत्सर्जित होती है। यह ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर 10 कोच वाली और 2400 किलोवाट क्षमता वाली दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है। फिलहाल यह पूरी तरह से ट्रायल स्टेज में है और कॉमर्शियल रूप से चल रही नहीं है।

मेक इन इंडिया की बड़ी सफलता

वंदे भारत ट्रेन देश की पहली स्वदेशी सेमी-हाईस्पीड ट्रेन है। यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) ट्रेन है, जिसमें आधुनिक डिजाइन, पुश-पुल सिस्टम, बेहतर एक्सेलरेशन, AC कोच, WiFi, इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक दरवाजे और पर्याप्त लगेज रैक जैसी सुविधाएं हैं। 2019 में दिल्ली-वाराणसी रूट से इसकी शुरुआत हुई और अब यह देश के कई प्रमुख रूट्स पर चल रही है। इसे मेक इन इंडिया की बड़ी सफलता माना जाता है।

वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह से EMU

दोनों ट्रेनों के कोच ICF, चेन्नई में निर्मित हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी, उपयोग के मामले और प्रदर्शन में दोनों अलग हैं। वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह से इलेक्ट्रिक EMU है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन DEMU (Diesel Electric Multiple Unit) पर आधारित है और इसे रेट्रोफिट किया गया है।

हाइड्रोजन ट्रेन 75–140 किमी/घंटा

स्पीड, लागत और डिजाइन की दृष्टि से भी दोनों ट्रेनों में अंतर है। वंदे भारत ट्रेन 160–180 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है और इसका डिज़ाइन हल्का और स्टेनलेस स्टील चेसिस वाला है। हाइड्रोजन ट्रेन 75–140 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है और फिलहाल केवल पायलट रूट पर ही संचालन में है। भारतीय रेलवे की ये पहलें न केवल यात्री सुविधा में सुधार लाती हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य के ट्रांसपोर्ट विकल्पों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्पीड और रूट:

वंदे भारत ट्रेन की स्पीड 160–180 किमी/घंटा है और यह इलेक्ट्रिफाइड मेनलाइन पर चलती है। इसके विपरीत, हाइड्रोजन ट्रेन की स्पीड 75–140 किमी/घंटा है और यह नॉन-इलेक्ट्रिफाइड रूट्स पर चलती है।

लागत और डिजाइन:

वंदे भारत ट्रेन की दूसरी जनरेशन का अनुमानित खर्च लगभग ₹115 करोड़ है। इसका डिजाइन मॉडर्न EMU स्टाइल में है, जिसमें स्टेनलेस स्टील चेसिस और लाइटवेट कोच शामिल हैं।

हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट पर है, इसलिए इसकी लागत की सीधे तुलना मुश्किल है। यह DEMU बेस पर रेट्रोफिट है, जिसमें दो पावर कार्स हैं (प्रत्येक 1200 kW फ्यूल सेल, कुल 2400 kW) और 8–10 कोच हैं।

रूट्स और विस्तार:

वंदे भारत ट्रेन पहले से ही सैकड़ों कॉमर्शियल रूट्स पर चल रही है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन वर्तमान में केवल जींद—हरियाणा रूट पर चल रही है। भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेन के 35 रूट्स पर विस्तार का प्लान है।

पर्यावरण प्रभाव:

वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह इलेक्ट्रिक है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन का उत्सर्जन केवल पानी है, जिससे यह बेहद इको-फ्रेंडली विकल्प बनती है।

रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों ही ट्रेनें भारत की आधुनिक रेलवे प्रणाली में भविष्य की भूमिका निभाएंगी, जहां वंदे भारत तेज़ और कॉमर्शियल रूट्स के लिए उपयुक्त है, वहीं हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और नॉन-इलेक्ट्रिफाइड रूट्स के लिए एक नए विकल्प के रूप में उभर रही है।

वंदे भारत vs हाइड्रोजन ट्रेन

जहां तक वंदे भारत ट्रेन और हाइड्रोजन ट्रेन की तुलना की बात है, तो वर्तमान में वंदे भारत ट्रेन कई प्रमुख रूट्स पर नियमित रूप से चल रही है और यात्रियों की अधिकांश आवश्यकताओं को पूरा करती है। वहीं, हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल केवल ट्रायल स्टेज पर है और इसका व्यापक संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है। इस वजह से, वर्तमान समय में दोनों ट्रेनों में “बेस्ट” चुनना मुश्किल है।

हालांकि, हाइड्रोजन ट्रेन का वर्तमान लाइफटाइम कॉस्ट अधिक है, लेकिन भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन सस्ता होने पर यह और अधिक किफायती विकल्प बन सकती है। इसके डिजाइन को विशेष रूप से पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है और यह कम ट्रैफिक वाले विशेष रूट्स के लिए अधिक उपयुक्त मानी जा रही है।

डिस्क्लेमर: इस खबर की जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स पर आधारित है, हिन्दी ख़बर इसकी सटीकता की पुष्टि नहीं करता है।

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