UP Politics : संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है। बर्क ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर बार संभल और मुरादाबाद आते हैं तो उन्हें सिर्फ “तुर्क” ही याद आते हैं। उन्होंने कहा कि जनता विकास, रोजगार, उद्योग, किसानों और युवाओं के लिए बड़ी घोषणाओं की उम्मीद कर रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री का पूरा फोकस हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर रहा।
विकास की बात के बजाय तुर्कों का जिक्र
रविवार को अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “तुर्क” शब्द से किसी तरह का डर दिखाई देता है। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री जब भी संभल या मुरादाबाद आते हैं तो विकास की बात करने के बजाय तुर्कों का जिक्र करने लगते हैं। बर्क ने कहा कि मुख्यमंत्री को तुर्कों का इतिहास पढ़ना चाहिए।
देश की आजादी के लिए संघर्ष किया
उन्होंने दावा किया कि तुर्कों ने केवल इस देश पर शासन ही नहीं किया, बल्कि भारत की आजादी की लड़ाई में भी अपना खून-पसीना बहाया। बर्क ने संभल के मौलाना इस्माइल और अब्दुल कय्यूम जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे तुर्क समुदाय से थे और उन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।
यह इतिहास मिटाया नहीं जा सकता
इतना ही नहीं, बर्क ने ताजमहल, लालकिला और कुतुब मीनार जैसी ऐतिहासिक इमारतों का जिक्र करते हुए कहा कि यह इतिहास मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे तुर्कों के खिलाफ बोलते हैं तो क्या इन ऐतिहासिक धरोहरों को भी खत्म कर देंगे।
सीएम को नफरत फैलाने की अनुमति नहीं
मुख्यमंत्री के संभल दौरे पर बर्क ने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि उद्योग लगाए जाएंगे, नई फैक्ट्रियां आएंगी, किसानों की आय बढ़ाने की योजना बनेगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा और जिले के विकास के लिए बड़े फैसले होंगे। लेकिन उनकी नजर में ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि “पिटारा खाली निकला” और केवल हिंदू-मुस्लिम राजनीति की बातें की गईं। बर्क ने कहा कि संविधान किसी भी मुख्यमंत्री को समाज में नफरत फैलाने की अनुमति नहीं देता।
ऐसी भाषा डर और नफरत पैदा करती है
मुख्यमंत्री के “100 साल तक कब्रों से निकाल लेंगे” वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बर्क ने कहा कि क्या मुख्यमंत्री के पास इस बात का कोई प्रमाण है कि वे 100 साल तक जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा समाज में डर और नफरत पैदा करती है। उनके अनुसार भारत संविधान से चलता है, किसी धार्मिक विचारधारा से नहीं। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का नाम लेते हुए कहा कि देश उनके आदर्शों पर चलना चाहिए।
विकास योजनाओं पर भी उठाए सवाल
बर्क ने मुख्यमंत्री द्वारा संभल में करीब 500 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के शिलान्यास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पहले किए गए वादों को दोहराने जैसी घोषणाएं हैं और चुनाव नजदीक होने के कारण इनके पूरा होने पर भी संदेह है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में विकास चाहती है तो संभल में बड़े अस्पताल, विश्वविद्यालय, स्कूल-कॉलेज, उद्योग और रोजगार देने वाली परियोजनाएं शुरू करे।
गलत आरोपों के आधार पर यह कार्रवाई
सपा सांसद ने अपने खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें लगातार परेशान कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उनका घर आज भी तोड़ा जा रहा है और यह कार्रवाई गलत आरोपों के आधार पर हो रही है। बर्क ने कहा कि अगर यही पैमाना अपनाया जाए तो भारतीय जनता पार्टी के 70 से 80 प्रतिशत नेताओं के घरों पर भी ऐसी ही कार्रवाई करनी पड़ेगी।
पुलिस प्रशासन के सामने कभी घुटने…
अपने दादा और पूर्व सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पांच दशकों तक संभल और देश की सेवा की तथा गरीबों और मजदूरों की आवाज विधानसभा से लेकर संसद तक उठाई। जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि वही उनकी प्रेरणा हैं और उन्होंने उनसे सीखा है कि सरकार और पुलिस प्रशासन के सामने कभी घुटने नहीं टेकने चाहिए।
टोपी उनकी पहचान और उनकी शान है
बर्क ने कहा कि जनता ने उन्हें संसद में अपनी आवाज उठाने के लिए भेजा है, न कि केवल व्यक्तिगत हितों के लिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य गरीब, मजदूर और आम लोगों के मुद्दों को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से उठाना है। अपनी पहचान को लेकर भी बर्क ने दो टूक कहा कि टोपी उनकी पहचान और उनकी शान है। उन्होंने कहा कि किसी में इतनी हिम्मत नहीं है कि उनकी टोपी उतार सके और लोग केवल बयानबाजी ही कर सकते हैं।
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