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दो बार UPSC में मिली असफलता, शादी का दबाव भी आया, फिर निधि सिवाच बनीं IAS अधिकारी

IAS Success Story : जिंदगी में कई बार मुश्किल हालात ही इंसान को अपनी असली ताकत पहचानने का मौका देते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा की बेटी निधि सिवाच की, जिन्होंने असफलताओं, पारिवारिक दबाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपने को पूरा किया। जिस बेटी से कहा गया था कि अगर वह सफल नहीं हुईं तो शादी कर दी जाएगी, उसी ने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का मुकाम हासिल किया।

निधि सिवाच की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने UPSC की तैयारी के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी। शुरुआती दो प्रयासों में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में शानदार रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बनीं।

गुरुग्राम से शुरू हुआ सफर

हरियाणा के गुरुग्राम की रहने वाली निधि सिवाच बचपन से ही अपने करियर को लेकर स्पष्ट थीं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि 10वीं कक्षा से ही उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना देख लिया था। 12वीं के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग चुनने के उनके फैसले से परिवार के लोग भी हैरान थे, क्योंकि यह क्षेत्र आमतौर पर लड़कियों के लिए कम चुना जाता था। लेकिन निधि ने अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।

साल 2015 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में नौकरी शुरू की। करीब दो साल तक काम करने के बाद उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना आया।

नौकरी छोड़कर शुरू की UPSC की तैयारी

नौकरी के साथ UPSC की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। समय की कमी और पढ़ाई के दबाव को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया और पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

हालांकि, यह फैसला आसान नहीं था। परिवार पहले ही उनके करियर संबंधी फैसलों को लेकर चिंतित था। इसी बीच उन पर शादी का दबाव भी बढ़ने लगा।

परिवार ने दिया आखिरी मौका

निधि ने बताया था कि परिवार की ओर से उन्हें शादी के लिए कहा जाने लगा था। उनका मानना था कि उन्होंने करियर को काफी समय दे दिया है और अब आगे बढ़ना चाहिए।

ऐसे समय में निधि ने अपने पिता से UPSC के लिए एक आखिरी मौका मांगा। उनके पिता ने शर्त रखी कि अगर वह सफल नहीं हो पाईं तो शादी के फैसले पर विचार किया जाएगा। यह शर्त प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू हर चरण के लिए रखी गई थी। इसके बाद निधि ने पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने खुद को पढ़ाई के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया।

दो बार असफलता के बाद तीसरे प्रयास में मिली सफलता

निधि ने नौकरी के दौरान UPSC के दो प्रयास किए थे, लेकिन दोनों बार उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और तीसरे प्रयास के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरीं।

उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी के जरिए तैयारी की। सबसे पहले उन्होंने UPSC के पूरे सिलेबस को समझा, जरूरी किताबों का चयन किया और अपनी कमजोरियों पर काम किया।

तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 83 प्राप्त की और IAS अधिकारी बनीं।

असफलताओं से सीख लेकर हासिल किया मुकाम

निधि सिवाच की सफलता इस बात का उदाहरण है कि असफलता के बाद भी अगर इंसान अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहे तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने अपने पहले दो प्रयासों की गलतियों को पहचाना और उन्हें सुधारते हुए तीसरे प्रयास में इतिहास रच दिया।

उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों और दबाव के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

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