Europe Heatwave : यूरोप के कई देशों में भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. जहां भारत में 40 डिग्री सेल्सियस का तापमान गर्मियों में सामान्य माना जाता है, वहीं यूरोप के लिए यही तापमान बड़ी चुनौती बन गया है. फ्रांस में गर्मी के कारण 1000 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा जर्मनी, ब्रिटेन और स्वीडन जैसे देशों में भी गर्मी का तेज असर लगातार बढ़ रहा है.
गर्मी की वजह से कई जगहों पर सामान्य जन- जीवन प्रभावित हुआ है. स्कूलों में पढ़ाई का समय घटाया जा रहा है और अभिभावकों से बच्चों को समय से पहले घर ले जाने की अपील की जा रही है. वहीं कई दफ्तरों में भी कामकाज पर असर पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि 40 डिग्री सेल्सियस का तापमान वास्तविक आंकड़े से कहीं अधिक महसूस हो रहा है.
घरों की बनावट बढ़ा रही परेशानी
यूरोप में मकानों का निर्माण मुख्य रूप से ठंड से बचाव को ध्यान में रखकर किया जाता है. घरों की डिजाइन और इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री इस तरह की होती है कि सर्दियों में अंदर गर्माहट बनी रहे. आमतौर पर वहां गर्मियों में तापमान बहुत अधिक नहीं पहुंचता, लेकिन इस बार 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से घरों के भीतर गर्मी का असर और ज्यादा महसूस किया जा रहा है.
पत्थर के मकान और कम एसी बने वजह
यूरोप के अधिकांश घर पत्थरों से बने होते हैं. ये पत्थर गर्म होने में समय लेते हैं, लेकिन एक बार गर्म होने के बाद देर से ठंडे होते हैं. ऐसे में दिनभर की गर्मी रात तक बनी रहती है. दूसरी ओर, यूरोप में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भी सीमित है और इसका दायरा करीब 7 प्रतिशत के आसपास बताया जाता है. अचानक बढ़ी गर्मी के कारण लोग बड़ी संख्या में कूलिंग उपकरण खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता भी सीमित बताई जा रही है.
लंबे समय से यूरोप में रहने वाले व्यक्ति ने बताई वजह
यूरोप में लंबे समय तक रह चुके रवि रंजन के अनुसार, वहां के घरों को इस तरह बनाया जाता है कि सर्दियों में ठंड का असर कम रहे. इसी कारण लोग घर के भीतर गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस नहीं करते, उन्होंने बताया कि यूरोप में भारत की तरह एसी, पंखे और कूलर का व्यापक उपयोग नहीं होता. यहां तक कि टेबल फैन का इस्तेमाल भी पिछले कुछ वर्षों में ही बढ़ा है. उनका कहना है कि ऐसे माहौल में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो लोगों के लिए उसे सहन करना कठिन हो जाता है, उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप के लोगों में लंबे समय से ठंडे मौसम के अनुरूप रहने की क्षमता विकसित हुई है, जबकि अधिक गर्म मौसम के अनुकूल रहने का अनुभव अपेक्षाकृत कम है.
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