विदेश

होर्मुज में अमेरिकी कार्रवाई, दो ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा, सेंट्रल इज़राइल में पेट्रोल पंप पर हमला, एक की मौत चार घायल

Middle East Crisis : अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये ड्रोन क्षेत्र में गुजर रहे व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। सेना ने बताया कि मध्य पूर्व में तैनात उसके बलों ने शनिवार को यह कार्रवाई की और किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब देने के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।

एक की मौत चार लोग घायल

इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय हालात को और अधिक अस्थिर बना रही है। इसी दौरान सेंट्रल इज़राइल में एक पेट्रोल पंप पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। मेडिकल अधिकारियों के अनुसार घायलों में एक की हालत गंभीर बनी हुई है।

नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 मार्च से जारी इज़राइली सैन्य अभियानों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। पिछले 24 घंटों में भी कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की सूचना है। इसी बीच शनिवार को लेबनानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी समेत कई लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इन हमलों के बाद कई क्षेत्रों में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं।

अमेरिका पर होगी आगे की जिम्मेदारी

अमेरिका ने दावा किया है कि उसने होर्मुज की ओर बढ़ रहे चार ईरानी ड्रोन को भी नष्ट किया और केश्म द्वीप स्थित रडार साइट्स पर कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया, जिन्हें इंटरसेप्ट कर लिया गया। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने सीरिक और केश्म द्वीप के तटीय रडार ठिकानों पर हमला कर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी आगे की स्थिति की जिम्मेदारी अमेरिका पर होगी।

12 अरब डॉलर की राशि की जाए जारी

इसी बीच CNN की रिपोर्ट के अनुसार संभावित शांति समझौते की एक अहम शर्त ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति को जारी करना बताया जा रहा है। ईरान की मांग है कि समझौते के साथ ही कम से कम 12 अरब डॉलर की राशि तुरंत जारी की जाए, जबकि अमेरिका इस पर अभी सहमत नहीं है।

संपत्तियों पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए

ईरान ने यह भी कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत में सबसे बड़ी बाधा उसका बदलता हुआ रुख है, जिससे किसी भी ठोस समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन प्रगति नहीं हो पा रही है। तेहरान का कहना है कि वह शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे अपने अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत बनाए रखना चाहता है और विदेशों में जमा उसकी संपत्तियों पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए।

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