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भारत में इथेनॉल क्रांति की नई शुरुआत, जानिए क्या हैं E85 और E100 फ्यूल, माइलेज बढ़ेगा या घटेगा?

Flex Fuel India : भारत सरकार पिछले कुछ सालों से पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग पर तेजी से काम कर रही है। इसी दिशा में अब एक और बड़ा कदम उठाया गया है। मौजूदा समय में देश में E20 पेट्रोल यानी 20% इथेनॉल मिला हुआ ईंधन पहले से ही उपलब्ध है, लेकिन अब सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 फ्यूल भी लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आने वाले समय में E100 फ्यूल लाने की तैयारी भी चल रही है।

तेल आयात पर निर्भरता होगी कम

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 6 जून को दिल्ली में E85 फ्यूल की शुरुआत की, जिसकी कीमत करीब 82 रुपये प्रति लीटर रखी गई है। सरकार का कहना है कि इससे देश की तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ेगा।

फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च किए

इसी बीच ऑटो कंपनियां भी इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मारुति सुजुकी ने वैगन आर का फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किया है, जबकि हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर प्लस और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च किए हैं, जिनकी बिक्री आने वाले महीनों में शुरू होने की उम्मीद है।

E85 और E100 फ्यूल क्या होते हैं?

E85 फ्यूल में करीब 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल मिलाया जाता है। वहीं E100 फ्यूल लगभग पूरी तरह इथेनॉल आधारित होता है, जिसमें 93 से 95% तक इथेनॉल और बाकी थोड़ा पेट्रोल या अन्य तत्व होते हैं। यह पेट्रोल ठंड में गाड़ी स्टार्ट करने और सुरक्षा कारणों से मिलाया जाता है।

लेकिन एक जरूरी बात यह है कि जो गाड़ियां सिर्फ E20 पेट्रोल के लिए बनी हैं, वे सीधे E85 या E100 पर नहीं चल सकतीं। इसके लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में खास बदलाव करने पड़ते हैं।

गाड़ियों में क्या बदलाव जरूरी होते हैं?

इथेनॉल पेट्रोल से अलग होता है, इसलिए इसके लिए गाड़ी में कुछ तकनीकी बदलाव करने पड़ते हैं।

फ्यूल सिस्टम को ज्यादा मजबूत बनाना पड़ता है क्योंकि इथेनॉल कम ऊर्जा देता है, इसलिए ज्यादा ईंधन की जरूरत होती है।

फ्यूल टैंक और पाइपलाइन को जंग से बचाने वाले मटेरियल से बनाना होता है क्योंकि इथेनॉल नमी सोख सकता है।

गाड़ी में सेंसर लगाए जाते हैं जो ECU को बताते हैं कि ईंधन में कितना इथेनॉल है, ताकि इंजन सही तरीके से काम कर सके।

फायदे क्या हैं?

इस फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को कच्चे तेल के लिए विदेशों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इथेनॉल देश में ही तैयार किया जाता है, इसलिए यह सस्ता और स्वदेशी विकल्प बन सकता है।

इसके अलावा इथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग ज्यादा होती है, जिससे इंजन बेहतर परफॉर्म करता है और प्रदूषण भी कम होता है।

नुकसान क्या हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हालांकि इसके कुछ नुकसान भी हैं। सबसे बड़ी समस्या माइलेज की है। E85 फ्यूल पर गाड़ी चलाने से माइलेज लगभग 20 से 30% तक कम हो सकता है, जबकि E100 में यह गिरावट और ज्यादा हो सकती है। इसका मतलब है कि बार-बार फ्यूल भरवाना पड़ेगा।

इसके अलावा फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियां सामान्य गाड़ियों से महंगी भी हो सकती हैं।

E85 और E100 जैसे फ्यूल भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम हैं, लेकिन इनके साथ माइलेज और तकनीकी बदलाव जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।

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