Organic Falsa Farming : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ किसान ऐसे भी हैं जो अपनी विरासत को संभालते हुए अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. यहां के एक किसान परिवार ने फालसे की खेती को पिछले कई दशकों से संजोकर रखा है और आज यह उनके लिए मजबूत आय का जरिया बन चुकी है.
किसान गोपाल पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में इस फालसे की बागवानी की शुरुआत करीब 100 साल पहले उनके दादा मोतीराम पटेल ने की थी. उस समय लगाए गए पौधों को आज भी उनकी तीसरी पीढ़ी संभाल रही है और उन्हीं से नियमित उत्पादन लिया जा रहा है.
गर्मियों में बढ़ती फालसे की मांग
गर्मी के मौसम में फालसा बाजार में काफी मांग में रहता है. इस समय यह फल लगभग 300 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है, जिससे किसानों को कुछ ही हफ्तों के सीजन में अच्छी कमाई हो जाती है. गोपाल पटेल के अनुसार, करीब 40 दिनों के छोटे से सीजन में ही इस खेती से एक से दो लाख रुपये तक की आय आसानी से हो जाती है.
यह खेती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से की जाती है. किसान बताते हैं कि इसमें किसी भी तरह के रासायनिक खाद या कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाता. पौधे अपने आप गर्मियों में हरे होकर फल देने लगते हैं, जिससे इसे ऑर्गेनिक फसल माना जाता है. इसी वजह से स्थानीय लोग सीधे खेत से आकर इसकी खरीदारी करते हैं.
परंपरागत खेती से रोजगार और आय
बता दें कि फालसे के औषधीय गुणों के कारण भी इसकी मांग बनी रहती है. इसे पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद और शरीर को ठंडक देने वाला फल माना जाता है, इसलिए डॉक्टर भी इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं.
गोपाल पटेल का कहना है कि उनके खेत में इस खेती से न सिर्फ परिवार की आजीविका चलती है, बल्कि करीब 5 से 8 लोगों को रोजगार भी मिलता है. इस तरह यह परंपरागत खेती आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है.
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