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अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के पास किया हमला, 87 लोगों की मौत, कई अब भी लापता

Iran Israel War : ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग में अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के पास ईरानी जहाज पर हमला किया है। प्रमुख समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस हमले में अब तक 87 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा 32 की हालत गंभीर है। अभी भी कई लापता है। श्रीलंका नौसेना द्वारा अभी तलाश जारी है।

अमेरिका ने दी थी हमले की जानकारी

आपको बता दें कि इस हमले की जानकारी अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने दी थी। उन्होंने बताया था कि अमेरिका ने हिन्द महासागर स्थित ईरानी युद्ध पोत पर सबमरीन से हमला किया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इस तरह का हमला पहली बार हुआ है। हमले की पुष्टि श्रीलंका नौसेना ने भी की थी। उनके अनुसार, ईरानी युद्ध पोत द्वारा आपातकालीन सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही श्रीलंका द्वारा बचाव दल भेजा गया था।

बताया जा रहा है कि ईरानी युद्धपोत विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में शामिल होने आया था। अभ्यास के बाद यह वापस लौट रहा था। उसी समय श्रीलंका के समीप हमला हुआ। यह IRIS DENA मौज-क्लास फ्रिगेट क्लास का युद्धपोत था।

श्रीलंका नौसेना द्वारा बचाव अभियान जारी

श्रीलंका द्वारा सूचना मिलने के बाद राहत बचाव जारी है। श्रीलंका नौसेना के प्रवक्ता बुद्धिका संपथ ने पत्रकारों से बताया कि अब तक 87 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। श्रीलंका विदेश मत्रालय के अनुसार, जहाज में 180 लोग सवार थे। श्रीलंका स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी डॉ. अनिल जयसिंघे ने बताया कि 79 घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

अब तक का घटनाक्रम

अमेरिका-इजरायल का फोकस ईरानी परमाणु सुविधाओं, सैन्य ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर पर रहा है। इस पर लगातार हमले हो रहे हैं। जवाब में ईरान द्वारा गल्फ देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस, दूतावासों और इजरायल पर ड्रोन-मिसाइल से हमला कर रहा है। साथ ही हॉर्मुज को बंद कर दिया है।

हिन्द महासागर तक पहुंची युद्ध की आंच

अभी तक यह लड़ाई मिडिल-ईस्ट देशों तक ही सीमित थी, लेकिन अमेरिकी सबमरीन के हमले से लड़ाई की आंच हिन्द महासागर में भी फैल गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से समुद्र व्यापार प्रभावित होने की संभावना है।

हिंद महासागर से कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 25-30 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। अगर यह लड़ाई हिंद महासागर में जारी रही तो भारत, चीन समेत अन्य एशियाई देशों पर ऊर्जा संकट बढ़ेगा।

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