Punjab Sehat Scheme : बीमारी कई घरों में केवल दर्द ही नहीं, बल्कि घबराहट भी लेकर आती है. अस्पताल में भर्ती होने का मतलब अक्सर जल्दबाजी में उधार लेना, गहने गिरवी रखना या कुछ ही दिनों में जीवनभर की बचत को खत्म होते देखना होता है. कई परिवार इलाज में देरी कर देते हैं, इस उम्मीद में कि शायद हालत खुद-ब-खुद सुधर जाए, क्योंकि इलाज का खर्च उन्हें बीमारी से भी ज्यादा भारी लगता है.
साल 2021 में ‘एप्लाइड हेल्थ इकोनॉमिक्स एंड हेल्थ पॉलिसी’ में प्रकाशित एक अध्ययन ने उस सच्चाई को उजागर किया, जिसे लोग पहले से महसूस करते थे. भारत में इलाज का खर्च परिवारों पर भारी पड़ता है और अक्सर उन्हें गंभीर आर्थिक संकट में धकेल देता है. राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में बताया गया कि कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियों का इलाज परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालता है, खासकर निजी अस्पतालों में. कई मामलों में यह खर्च लोगों को लंबे समय तक गरीबी में धकेल देता है. यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि बीमारी केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि आर्थिक संकट का भी बड़ा कारण है.
इलाज बना आर्थिक बोझ से राहत
इसी बीच पंजाब में एक अलग तस्वीर उभरकर सामने आ रही है. ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है. इस योजना के जरिए लोगों को यह भरोसा मिल रहा है कि इलाज अब आर्थिक बोझ नहीं बनेगा.
पंजाब में, जहां पहले अस्पतालों के बिल परिवारों को कर्ज और निराशा में धकेल देते थे, वहीं अब यह योजना लोगों के जीवन में राहत लेकर आई है. ₹10 लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने वाली इस योजना के तहत अब तक 1.59 लाख से अधिक लाभार्थियों को फायदा मिल चुका है. आम परिवारों के लिए यह योजना बड़ी राहत साबित हो रही है, जो पहले बीमारी के नाम से ही आर्थिक चिंता में पड़ जाते थे.
839 अस्पतालों में मिल रही योजना की सुविधा
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति केवल पैसों की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे. यह योजना जटिल सर्जरी, हृदय रोग, डायलिसिस, नवजात शिशु देखभाल और गंभीर बीमारियों के इलाज तक व्यापक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है.”
यह योजना ‘अपडेटेड हेल्थ बेनिफिट पैकेज 2.2’ फ्रेमवर्क के तहत संचालित हो रही है, जिसमें लगभग 2,300 स्वास्थ्य लाभ पैकेज शामिल हैं. ये सुविधाएं 839 सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध हैं, जबकि 98 विशेष पैकेज केवल सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित हैं.
43 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी
अब तक 16 मई तक 1.59 लाख से अधिक लाभार्थियों का इलाज किया जा चुका है और 3.11 लाख से अधिक प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं. इस दौरान ₹522 करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है.
इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे रहा है. अब तक 43 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं. लुधियाना, पटियाला और जालंधर जैसे जिलों में इसका विशेष प्रभाव देखने को मिला है, जहां लोग अब इलाज के लिए पहले से अधिक जागरूक और सुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
सरल रजिस्ट्रेशन और पहले-बाद के खर्च भी शामिल
इस योजना की सबसे खास बात इसकी सरल प्रक्रिया है. रजिस्ट्रेशन कॉमन सर्विस सेंटर, सरकारी अस्पतालों, जिला कार्यालयों और विशेष शिविरों में किया जा सकता है. इसके लिए आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे सामान्य दस्तावेज पर्याप्त हैं. योजना में अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च भी शामिल हैं, जिससे मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत मिलती है.
स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत परिवारों को सालाना ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध है, जिसमें सर्जरी, कैंसर उपचार, डायलिसिस, नवजात देखभाल और आपात सेवाएं शामिल हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है. तेजी से बढ़ते इलाज खर्चों के बीच यह योजना केवल आर्थिक राहत ही नहीं, बल्कि लोगों को एक भरोसा भी देती है कि बीमारी अब जीवन की आर्थिक तबाही का कारण नहीं बनेगी.
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