
Ram Mandir Donation Case : उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की पड़ताल में नए खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, केवल गणनाकर्मियों ही नहीं बल्कि ट्रस्ट से जुड़े और उसके प्रभाव क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 30 लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। कई संदिग्ध व्यक्तियों से लंबी पूछताछ की गई, जिसमें उनके जवाबों को संतोषजनक नहीं माना गया।
टिन्नू यादव समेत पांच लोगों पर एफआईआर की संभावना
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर टिन्नू यादव, लवकुश, अनुकल्प और दो अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की तैयारी बताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि इन लोगों के पास से नकदी मिलने के संबंध में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं। एसआईटी ने इनसे करीब 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है।
शासन और पीएमओ के निर्देशों का इंतजार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंतिम निर्णय शासन स्तर पर समीक्षा और एसआईटी रिपोर्ट के अध्ययन के बाद लिया जाएगा। चूंकि मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार के निर्णय के तहत हुआ था, इसलिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। आगे की कार्रवाई और संभावित पुनर्गठन को लेकर पीएमओ के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
पीएमओ अधिकारियों ने भी की स्वतंत्र पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, विवाद सामने आने के बाद से ही पीएमओ लगातार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि पीएमओ के कुछ अधिकारियों ने अयोध्या पहुंचकर स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाई और अपनी गोपनीय रिपोर्ट भी तैयार की है। इस रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक लापरवाही और कुछ पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका का उल्लेख किए जाने की चर्चा है।
गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य बने जांच का आधार
एसआईटी और अन्य जांच टीमों ने उन लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं जिन्होंने ट्रस्ट प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। सूत्रों का कहना है कि इन बयानों को जांच में महत्वपूर्ण माना गया है। साथ ही कई दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।
टिन्नू यादव की भूमिका पर सबसे अधिक सवाल
जांच के दौरान टिन्नू यादव की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में रही है। बताया जाता है कि वह पहले चंपत राय के ड्राइवर के रूप में कार्य कर चुका है और बाद में मंदिर से जुड़े कई कार्यों में उसका प्रभाव बढ़ गया था। सूत्रों का दावा है कि संभावित एफआईआर में उसे प्रमुख आरोपी बनाया जा सकता है। जांच एजेंसियां अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
आईपीएस निगरानी में हो सकती है आगे की विवेचना
सूत्रों के अनुसार, मामले की आगे की जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में गठित विशेष टीम को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। प्रारंभिक एफआईआर में कुछ नाम शामिल किए जा सकते हैं, जबकि विवेचना के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके नाम भी जोड़े जा सकते हैं।
एसआईटी रिपोर्ट में लापरवाही और अनियमितताओं का उल्लेख
जांच टीम ने चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामलों में विभिन्न साक्ष्य और गवाहों के बयान संकलित किए हैं। रिपोर्ट में कुछ पदाधिकारियों की संभावित संलिप्तता की आशंका के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियों और प्रशासनिक लापरवाही का भी विस्तृत उल्लेख किए जाने की जानकारी सामने आई है।
निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि मंदिर परिसर में लागू की गई सुरक्षा और निगरानी संबंधी गाइडलाइन का पूर्ण पालन नहीं हो रहा था। सूत्रों का कहना है कि इस वजह से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया में ट्रस्ट के कई जिम्मेदार पदाधिकारी भी मुश्किलों में पड़ सकते हैं।
40 गणनाकर्मी हटाए गए, सुरक्षा व्यवस्था सख्त
मामले के सामने आने के बाद चढ़ावे की गणना में लगे लगभग 40 कर्मचारियों को हटाया जा चुका है। उनकी जगह बैंक की ओर से नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। एसआईटी ने ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन से जुड़े प्रमुख अधिकारियों को फिलहाल अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री को सौंपी जा सकती है प्रारंभिक रिपोर्ट
छह दिनों तक अयोध्या में जांच करने के बाद एसआईटी लखनऊ लौट चुकी है। जानकारी के अनुसार, 150 से अधिक पृष्ठों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट पर विचार-विमर्श के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता तय होगा।
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