
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों की कम उपस्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने उन घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की, जहां छात्र क्लास बंक कर कैंपस में घूमते नजर आते हैं और बाद में परीक्षा में बैठने का अधिकार मांगते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि केवल न्यूनतम उपस्थिति की कमी के आधार पर किसी भी छात्र को परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता।
बार काउंसिल और लॉ कॉलेजों की याचिका
इस फैसले के खिलाफ लॉ कॉलेजों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से याचिकाएं दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे, ने इन याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 21 जुलाई तय की है।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि कम अटेंडेंस की वजह से देश की कई नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में अनुशासन और शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश छात्रों के लिए क्लास में न आने को “फ्री पास” जैसा समझा जा सकता है।
हाई कोर्ट का पिछला आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी भी मान्यता प्राप्त लॉ संस्थान में दाखिला लेने वाले छात्र को सिर्फ कम हाजिरी के आधार पर परीक्षा देने या आगे की पढ़ाई से नहीं रोका जा सकता। इसी आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल के लिए रोक दिया है।
अगली सुनवाई 21 जुलाई को
मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिसमें कोर्ट इस विवाद पर विस्तार से विचार करेगा और अंतिम दिशा तय करेगा।
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