Madhya Pradesh

‘जाति के आगे पार्टी कुछ नहीं…’, गोपाल भार्गव के बयान पर सियासी हलचल तेज

Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश के सागर जिले में आयोजित परशुराम जयंती कार्यक्रम के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने जातिगत समीकरणों को लेकर एक टिप्पणी की, जिस पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज और राजनीति में जातीय पहचान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, स्वतंत्रता से पहले ब्राह्मण समाज की जो सामाजिक स्थिति और प्रभाव था, वह अब पहले जैसा नहीं रह गया है और समय के साथ इसमें बदलाव आया है.

लोकतंत्र और मतदान से जुड़ी प्रगति

भार्गव ने आगे कहा कि राजनीति में भले ही दलगत निष्ठा की बात की जाती हो, लेकिन व्यवहारिक रूप से लोग अपने समाज और समुदाय के लोगों को प्राथमिकता देते हैं, उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति का अपने ही समाज का उम्मीदवार चुनाव मैदान में होता है, तो कई बार समर्थन का रुझान उसी तरफ चला जाता है, भले ही सार्वजनिक रूप से कुछ और कहा जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में आर्थिक और सामाजिक प्रगति काफी हद तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदान से जुड़ी हुई है. नौकरी, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार जैसे मुद्दे लोगों की राजनीतिक भागीदारी से प्रभावित होते हैं, इसलिए समाज के लोगों का संगठित रहना जरूरी हो जाता है.

समाज को संगठित होकर आगे बढ़ने पर जोर

अपने बयान में गोपाल भार्गव ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी तरह का वर्ग संघर्ष या टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि यह समझाना है कि समाज को अपनी स्थिति सुधारने के लिए संगठित होकर आगे बढ़ना चाहिए, उन्होंने कहा कि बुनियादी जरूरतें जैसे बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन हर व्यक्ति को मिलना चाहिए, और इन्हीं मुद्दों पर समाज के भीतर चर्चा होना स्वाभाविक है.

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