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6 फरवरी तक SC/ST एक्ट नहीं हटा तो…अलंकार अग्निहोत्री ने दी केंद्र को बड़ी चेतावनी

Alankar Agnihotri : बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार शाम काशी के केदारघाट स्थित विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक और शुभ संयोग है।

अग्निहोत्री ने बताया कि शंकराचार्य से सामाजिक परिस्थितियों, सनातन संस्कृति और मौजूदा हालातों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पहले प्रयागराज में आमंत्रण मिला था, लेकिन समयाभाव के कारण नहीं पहुंच सके। काशी आगमन पर यह अवसर मिला, जो उनके लिए भावनात्मक रूप से भी खास रहा क्योंकि उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की है।

SC/ST एक्ट को लेकर केंद्र पर सीधा प्रहार

मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने SC/ST एक्ट को देश का “सबसे बड़ा काला कानून” बताते हुए कहा कि इस कानून के तहत दर्ज लगभग 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं, जिससे समाज के बड़े वर्ग को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि UGC के नए रेगुलेशन पर फिलहाल रोक लगना राहत की बात है, लेकिन असली लड़ाई SC/ST एक्ट को खत्म करने की है। अग्निहोत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 6 फरवरी तक यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो केंद्र सरकार को उखाड़ फेंका जाएगा।

चार्टर्ड प्लेन में गुजरात भेज देंगे

अपने बयान को और सख्त करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार नहीं मानी, तो केंद्र को “चार्टर्ड प्लेन में बिठाकर गुजरात वापस भेज दिया जाएगा।” उन्होंने इसे अंतिम चेतावनी करार दिया।

लड़ाई कभी राज्य सरकार से नहीं थी

जब उनसे पूछा गया कि पहले राज्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अब केंद्र सरकार निशाने पर क्यों है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई शुरू से ही केंद्र सरकार से रही है, न कि राज्य सरकार से।

राज्य प्रशासन पर दबाव का आरोप

अलंकार अग्निहोत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर राज्य सरकार के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य प्रशासन अत्यधिक दबाव में काम कर रहा है और योजनाबद्ध तरीके से राज्य के फंड को गुजरात भेजने की तैयारी की जा रही है।

इस्तीफे के बाद लगातार चर्चा में

गौरतलब है कि प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के पवित्र स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के प्रतीकों का अपमान वह सहन नहीं कर सके, इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।

जाति आधारित भेदभाव पर चेतावनी

29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC रेगुलेशन-2026 पर रोक लगाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जाति-आधारित भेदभाव के प्रावधानों का संस्थागत दुरुपयोग गंभीर सामाजिक परिणाम ला सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे देश में आंतरिक अशांति भी फैल सकती है।

एक मीडिया एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि जाति आधारित भेदभाव को कभी भी संस्थागत हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि इसे संवाद और संवेदनशील शब्दावली तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।

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