
Rajasthan SI Paper Leak : राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप SOG ने वर्ष 2021 की सब-इंस्पेक्टर SI भर्ती परीक्षा में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है. जांच में यह सामने आया है कि परीक्षा के टॉप 24 अभ्यर्थियों ने या तो प्रश्नपत्र लीक होने का फायदा उठाया या फिर परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाकर रैंक हासिल की. इस लिस्ट में परीक्षा में पहला स्थान पाने वाला नरेश कुमार भी शामिल है, जिसे पहले आदर्श अभ्यर्थी माना जाता था.
टॉपर बना नरेश भी निकला फर्जी
सांचौर निवासी नरेश कुमार, जो 2021 की SI परीक्षा का टॉपर था, लीक पेपर और डमी कैंडिडेट की मदद से पास हुआ. मार्च 2022 में जब पुलिस ट्रेनिंग ले रहे SI बैच की गिरफ्तारी हुई थी, तब नरेश भी उनमें शामिल था.
पूर्व RPSC सदस्य के परिवार पर भी संदेह
जांच में सामने आया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग RPSC के पूर्व सदस्य रामूराम रैका की भूमिका भी संदिग्ध रही है. उनकी बेटी शोभा और बेटा देवेश भी परीक्षा में टॉप करने वालों में शामिल थे. शोभा को पांचवां और देवेश को 40वां स्थान मिला था. जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों को अपने पिता की पहुंच और प्रभाव का लाभ मिला.
री-टेस्ट में खुले पोल
जब राजस्थान पुलिस अकादमी RPA में इन टॉप रैंक धारकों से दोबारा वही प्रश्न हल करवाए गए, तब उनकी असलियत सामने आ गई. शोभा, जिसने मूल परीक्षा में हिंदी में 188.68 और सामान्य ज्ञान में 154.84 अंक हासिल किए थे, री-टेस्ट में केवल 24 हिंदी और 34 GK सवाल ही सही कर पाई.
इसी तरह, टॉपर मंजी देवी (11वीं रैंक) मूल परीक्षा में 351.64 अंक लेकर आई थीं, लेकिन री-टेस्ट में वह सिर्फ 52 हिंदी और 71 GK सवाल हल कर सकीं. देवेश रैका और विजेंद्र कुमार जैसे अन्य अभ्यर्थियों का भी प्रदर्शन री-टेस्ट में बेहद कमजोर रहा.
साधारण सवालों में भी फेल
एक अधिकारी ने बताया कि इन अभ्यर्थियों को राजस्थान की सामान्य संस्कृति, कला, संविधान जैसे बेसिक टॉपिक्स के सवालों के भी उत्तर नहीं पता थे. इनका स्कोर इतना अधिक था कि वर्षों से तैयारी कर रहे RAS उम्मीदवार भी उसके आस-पास नहीं पहुंच सके.
परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी, सफलता चंद फर्जी अभ्यर्थियों की
गौरतलब है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 3 फरवरी 2021 को SI और प्लाटून कमांडर के 859 पदों के लिए भर्ती की अधिसूचना जारी की थी. करीब 7.97 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया, लेकिन 3.83 लाख ने ही परीक्षा दी. आब यह सामने आ रहा है कि जिन लोगों ने शीर्ष रैंक हासिल की, उनमें से अधिकांश ने प्रक्रिया को धोखा देकर सफलता पाई.
यह खुलासा न केवल भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है, बल्कि हजारों मेहनती अभ्यर्थियों के साथ अन्याय की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है.
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