
West Bengal Politics : तृणमूल कांग्रेस को बुधवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसके बाद सियासी हलचल और तेज हो गई. वे अब उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मिलकर अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपेंगी. इससे पहले पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं और कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों द्वारा कथित तौर पर नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को समर्थन देने की बात कही गई थी. सूत्रों के अनुसार, सुष्मिता देव के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है.
बागी टीएमसी सांसदों के दावों से हलचल तेज
बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम उस समय और चर्चा में आया, जब बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने एनडीए के साथ जुड़ने की इच्छा जताई है. उन्होंने यह भी कहा था कि इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा गया है. बताया जा रहा है कि दस्तीदार बागी गुट का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय को इस समूह में डिप्टी लीडर बनाया गया है. इन दावों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष को लेकर राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं.
दिल्ली में पार्टी गतिविधियों में बदलाव
इन सब के बीच, राजधानी दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला है. पार्टी के सांसद पार्थ भौमिक ने मंगलवार को दिल्ली स्थित वह सरकारी आवास खाली कर दिया, जो पार्टी के कार्यों का प्रमुख केंद्र माना जाता था. बताया गया कि यह निर्णय उन्होंने स्वयं लिया.
नेतृत्व ने मतभेदों पर सख्त रुख अपनाया
उधर, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागी गुट के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि असहमति रखने वाले नेताओं को संगठन के भीतर रहने के बजाय अपने पद छोड़ने चाहिए.
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