Middle East Crisis : ईरान में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की शक्तियों को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित कर दी है।
इजराइली चैनल-14 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ संभावित बातचीत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अब अंतिम निर्णय सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े अधिकारियों के हाथ में होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में राष्ट्रपति की मंजूरी पहले जैसी निर्णायक नहीं रहेगी।
सुरक्षा संस्थानों की सलाह को प्राथमिकता
बताया जा रहा है कि पजशकियान पहले भी इस बात को लेकर असंतोष जता चुके हैं कि उनकी सरकार को कई अहम फैसलों में पर्याप्त भूमिका नहीं मिल रही है। उन्होंने कथित तौर पर इस्तीफे की पेशकश भी की थी। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रणनीतिक मामलों में सेना और सुरक्षा संस्थानों की सलाह को प्राथमिकता दी जाएगी।
अमेरिका-ईरान बातचीत पर अभी तस्वीर साफ नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता को लेकर अभी तक तारीख और स्थान तय नहीं हो पाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान और कतर संभावित मध्यस्थ देशों के रूप में बातचीत में शामिल हो सकते हैं और दोनों देश तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान की रणनीति में बदलाव का दावा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और प्रमुख शिपिंग मार्गों पर दबाव बढ़ाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
MQ-9 रीपर ड्रोन गिराने का ईरान का दावा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से निशाना बनाया। हालांकि, ड्रोन किस देश से संबंधित था, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अमेरिका ने बढ़ाए दबाव के विकल्प
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सैन्य और रणनीतिक विकल्पों की समीक्षा की जा रही है।
हूती धमकी के बाद बदला जहाजों का रास्ता
यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर जाने के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री मार्ग चुना। इससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
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