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SCO समिट में भारत-चीन रिश्तों की नई दिशा: आतंकवाद पर सहयोग की उम्मीद, हिंदी ख़बर की खास विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

हाइलाइट्स :-

  •  SCO समिट से भारत-चीन रिश्तों में सुधार की उम्मीद.
  • आतंकवाद पर साझा प्रतिबद्धता, सहयोग की जरूरत.
  • भारत-रूस-चीन के बीच आर्थिक और सामरिक रिश्तों में मजबूती की संभावना.

PM Modi In SCO Summit 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में है. 7 साल बाद पीएम मोदी चीन की धरती पर पहुंचे हैं, और उनके इस दौरे को लेकर उम्मीदें काफी ज्यादा हैं. प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा विशेष रूप से शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए है, जहां वह भारत के सामरिक और आर्थिक हितों को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं.

इस दौरे पर हिंदी ख़बर की खास नजर है और हमारे प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए तियानजिन, चीन में मौजूद हैं, उन्होंने इस कार्यक्रम पर कुछ अहम बातें  साझा की हैं, जो भारत-चीन संबंधों पर नई रोशनी डालती हैं.


अमेरिका की दादागिरी और उसका प्रभाव

प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल का मानना है कि अमेरिका की आक्रामक नीतियों ने भारत, रूस और चीन को एक-दूसरे के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई है. उनका कहना है कि अमेरिका की दादागिरी ने इन देशों को अपनी सामरिक और रणनीतिक स्थितियों में बदलाव करने को मजबूर किया, जिससे इन तीनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिला है. भारत, चीन और रूस ने मिलकर एक साझा रणनीति बनाई है, जो उनके सामरिक हितों को पूरा करती है और साथ ही अमेरिका की दादागिरी का मुकाबला करती है.


चीन-भारत रिश्तों में सुधार की उम्मीद

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा एक “ब्लेसिंग इन डिसगाइस” साबित हो सकता है, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है. अतुल अग्रवाल के अनुसार, यह दौरा भारत और चीन के रिश्तों को सुधारने का एक सुनहरा मौका हो सकता है. चीन और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों से जो दूरियां आई थीं, उन्हें इस दौरे के बाद कम किया जा सकता है, और दोनों देशों के बीच रिश्तों में नयापन आ सकता है.


हारमोनियस को-एक्जिस्टेंस और शेयरड फ्यूचर पर विचार

इस बार के शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन SCO समिट में “हारमोनियस को-एक्जिस्टेंस” और “शेयरड फ्यूचर” जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी जो इस कार्यक्रम का थीम भी है. प्रधान संपादक ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इन तीन देशों को मिलकर एक साझा भविष्य की दिशा में काम करने की आवश्यकता है. अतुल अग्रवाल के अनुसार, यह विचार भारत, चीन और रूस के रिश्तों को बेहतर बनाने और एक स्थिर भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करेगा.


रूस, भारत और चीन के रिश्तों में मजबूती

प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने इस दौरे के महत्व को और स्पष्ट करते हुए कहा कि यह दौरा रूस, भारत और चीन के रिश्तों को मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. व्यापार, आर्थिक विकास, और सामाजिक सहयोग के क्षेत्रों में इन देशों के रिश्तों को और मजबूती मिलेगी. खासतौर पर व्यापारिक और आर्थिक दृष्टिकोण से यह तीनों देशों के लिए एक सकारात्मक कदम हो सकता है.


आतंकवाद और भारत-चीन संबंधों में रुकावट

प्रधान संपादक के अनुसार, भारत और चीन के रिश्तों में तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण आतंकवाद है. उनका मानना है कि आतंकवादी गतिविधियां, जो भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं, दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास की कमी का कारण रही हैं. हालांकि, दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को बार-बार व्यक्त किया है, लेकिन इस मुद्दे पर एकजुट सहयोग की आवश्यकता है. अतुल अग्रवाल के अनुसार, यदि चीन इस दिशा में भारत के साथ खुलकर सहयोग करता है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों में सुधार का एक बड़ा अवसर बन सकता है.


आतंकवाद के मुद्दे पर बदलाव की आशा

उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है, जिससे चीन पाकिस्तान से अपने रिश्ते बदल सकता है और भारत के साथ संबंधों में सुधार ला सकता है. यदि ऐसा होता है तो भारत और चीन दोनों मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बना सकते हैं, जो न केवल एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी साबित होगा.


तीनों देशों में आपसी सहयोग को मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह चीन दौरा न केवल भारत-चीन के रिश्तों को नया मोड़ देगा, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है. यह दौरा रूस, भारत और चीन के सहयोग को मजबूती देने के लिए अहम साबित हो सकता है. आतंकवाद और आर्थिक मुद्दों पर दोनों देशों का मिलकर काम करना, भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों को और बेहतर बना सकता है. दुनिया की नजरें इस दौरे पर टिकी हैं, और यह देखने की बात होगी कि भारत और चीन इस ऐतिहासिक मौके का कैसे लाभ उठाते हैं.


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