Yudh Nasheyan Virudh : भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की शुरुआत के बाद पंजाब के 14 जिलों में स्थित नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में फैमिली काउंसलिंग अब रिकवरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। काउंसलरों के अनुसार, उपचार करा रहे मरीजों के इलाज के दौरान माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मार्च 2025 में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान शुरू होने के बाद से हजारों परिवार अपने बच्चों को नशे की लत से बाहर निकालने और उनका जीवन दोबारा संवारने के लिए काउंसलिंग सत्रों में भाग ले रहे हैं।
इलाज के बाद आया जीवन में बड़ा बदलाव
नशे की समस्या केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की होती है। इसलिए परिवार की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। काउंसलिंग के माध्यम से परिवार नशे की प्रकृति को समझते हैं और मरीज को नशा-मुक्त बने रहने में सहयोग प्रदान करते हैं। रूपनगर के सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन एक मरीज ने बताया कि इलाज के बाद उसके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। उसने कहा कि उसके परिवार का सहयोग उसकी रिकवरी में सबसे महत्वपूर्ण रहा।
प्रेम और समझदारी से किया जाए व्यवहार
उसने कहा, “मैं कई वर्षों से शराब का सेवन कर रहा था। मेरी सेहत बहुत खराब हो गई थी, लेकिन यहां आने के बाद मुझे बहुत लाभ हुआ है। मेरे अंदर काफी सुधार आया है। मेरे परिवार ने भी मेरा पूरा साथ दिया है। मेरा संदेश है कि ऐसे लोगों के साथ प्रेम और समझदारी से व्यवहार किया जाना चाहिए तथा डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
सुबह जल्दी उठता है, व्यायाम करता है…
उसके परिवार के एक सदस्य ने (नाम न बताने की शर्त पर) कहा कि काउंसलिंग के जरिए उन्हें यह समझ आया कि नशे की समस्या से कैसे निपटना है। उन्होंने बताया, “पहले वह बहुत अधिक उत्तेजित हो जाता था और बेवजह पैसे खर्च करता था। वह अक्सर नशे की हालत में घर आता था। हम उसके जूते उतारकर उसे बिस्तर पर सुला देते थे। चिकित्सकीय इलाज के बाद उसमें काफी सुधार आया है। अब वह सुबह जल्दी उठता है, व्यायाम करता है, स्नान करता है और नाश्ता करता है। हालांकि कभी-कभी वह अभी भी थोड़ा उत्तेजित हो जाता है, लेकिन पहले की तुलना में बहुत बेहतर है।
मरीज में होने वाले बदलाव के प्रति सतर्क
रूपनगर स्थित पंजाब सरकार के नशा मुक्ति केंद्र की फैमिली काउंसलर सुमेधा ने कहा कि जब मरीज घर वापस लौटता है तो परिवार के सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, “दोबारा नशे की ओर जाने से रोकने में परिवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। जब मरीज घर लौटते हैं, तब उनके साथ डॉक्टर या काउंसलर नहीं होते। ऐसे में परिवार के सदस्य ही उनके काउंसलर बन जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें मरीज में होने वाले किसी भी बदलाव के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
बाद में पता चला वह पैसे चोरी करता था
जालंधर के नशा मुक्ति केंद्र में रानी, जिनका पुत्र ‘चिट्टे’ की लत का इलाज करवा रहा है, ने बताया कि पेशेवर मदद लेने से पहले उनके परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “वह मुझे रिश्तेदारों या पड़ोसियों के घर भेज देता था और फिर अपने दोस्तों के साथ घर के दरवाजे बंद कर लेता था। तभी मुझे शक हुआ। बाद में पता चला कि वह पैसे चोरी करता था और मेरी बेटी तथा दामाद से भी पैसे मांगता था, और वे उसे दे देते थे। लेकिन जब से हम यहां आए हैं, मैंने उसमें स्पष्ट सुधार देखा है।
इलाज से ज्यादा समाज की सोच की चिंता
काउंसलरों का कहना है कि मरीजों की मदद करने के साथ-साथ काउंसलिंग परिवारों को नशे से जुड़ी सामाजिक बदनामी से उबरने में भी सहायता करती है। जालंधर के सरकारी नशा मुक्ति केंद्र की काउंसलर हर्षा ने कहा, “कई परिवार शुरुआत में इलाज से ज्यादा समाज की सोच की चिंता करते हैं। वे बदनामी से अधिक डरते हैं। परिवारों को यह नहीं पता होता कि नशा क्या है। वे इसे बीमारी नहीं मानते। काउंसलिंग उपचार में बहुत मददगार साबित होती है।
यह एक बार में होने वाला समाधान नहीं
कपूरथला नशा मुक्ति केंद्र के काउंसलर डॉ. राकेश शर्मा ने कहा, “हम परिवारों को बताते हैं कि उन्हें बहुत अधिक उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए। यह एक बार में होने वाला समाधान नहीं है। इसमें दोबारा नशे की ओर लौटने (रिलैप्स) की संभावना हो सकती है और यह रिकवरी प्रक्रिया का हिस्सा है। साथ ही परिवारों को सीमाएं तय करनी चाहिए, लेकिन शांत और संयमित तरीके से, बिना गुस्सा किए।” धीरे-धीरे परिवार अब इस समस्या को छिपाने की बजाय सक्रिय रूप से मदद मांग रहे हैं और उपचार प्रक्रिया में भागीदार बन रहे हैं।
परिवारों की सक्रिय भागीदारी में हुई वृद्धि
पुनर्वास कार्यक्रमों से जुड़े काउंसलरों का कहना है कि ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान शुरू होने के बाद परिवारों की सक्रिय भागीदारी में वृद्धि हुई है। अब जीवनसाथी, माता-पिता और अन्य परिवारजन काउंसलिंग सत्रों में शामिल हो रहे हैं, नशे की समस्या को समझ रहे हैं और बिना दोषारोपण किए अपने प्रियजनों का सहारा बनने के तरीके सीख रहे हैं।
स्वस्थ तथा बेहतर जीवन जीने की संभावना
हालांकि पुनर्वास और चिकित्सकीय उपचार दोनों ही आवश्यक हैं, लेकिन एक सहयोगी और स्थिर पारिवारिक वातावरण रिकवरी को और मजबूत बनाता है। परिवार का सहयोग व्यक्ति के नशा-मुक्त रहने और स्वस्थ तथा बेहतर जीवन जीने की संभावना को काफी बढ़ा देता है।
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