खेत-खलिहान

किचन गार्डन में पर्पल पत्तागोभी उगाने का आसान तरीका, घर बैठे मिलेगा जबरदस्त फायदा

Purple Cabbage Farming : किचन गार्डन का शौक रखने वाले अब पर्पल पत्तागोभी यानी रेड कैबेज भी उगा रहे हैं. आमतौर पर बाजार में यह सब्जी करीब 150 रुपये प्रति किलो तक बिकती है. यह देखने में आकर्षक होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. इसमें सामान्य पत्तागोभी की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन पाए जाते हैं, जो इसे डाइट का अहम हिस्सा बनाते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे घर के पीछे खाली जगह या छत पर बड़े गमलों में भी आसानी से उगाया जा सकता है. अगर आप महंगी और केमिकल वाली सब्जियों से बचना चाहते हैं, तो पर्पल पत्तागोभी की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है.

इसकी अच्छी ग्रोथ के लिए उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी जरूरी होती है. इसे तैयार करने के लिए 60% मिट्टी में 30% गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और 10% कोकोपीट मिलाया जा सकता है, जिससे जड़ों को फैलने के लिए सही नमी और जगह मिलती है.

नर्सरी ट्रे में पौध तैयार करना

बीजों को सीधे न लगाकर पहले नर्सरी ट्रे में पौध तैयार करना बेहतर होता है, फिर उन्हें ट्रांसप्लांट किया जाता है. पौधों के बीच 12 से 15 इंच की दूरी रखनी चाहिए ताकि गोभी का फूल ठीक से विकसित हो सके. सही तरीके से तैयार क्यारी में पौधे तेजी से मजबूत होते हैं.

ठंडा मौसम और धूप की जरूरत

यह सब्जी ठंडे मौसम में अच्छी बढ़त करती है, इसलिए इसे ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां 5-6 घंटे धूप आती हो. सिंचाई में खास ध्यान रखना जरूरी होता है, क्योंकि बहुत ज्यादा सूखा या ज्यादा पानी होने पर फूल खराब होने का खतरा रहता है. रोज हल्की सिंचाई से मिट्टी में नमी बनी रहती है और पानी का जमाव नहीं होता.

हर 20-25 दिन में लिक्विड फर्टिलाइजर या जीवामृत का इस्तेमाल करने से पत्तों का रंग और चमक बेहतर बनी रहती है. सही देखभाल से पौधा अच्छी तरह विकसित होता है और पत्तियां घनी व मजबूत बनती हैं.

ताजी और पेस्टिसाइड फ्री सब्जी

इस फसल में अक्सर कीड़े या इल्लियों का खतरा रहता है, जिससे बचाव के लिए नीम के तेल का स्प्रे एक सुरक्षित और ऑर्गेनिक तरीका है. जब गोभी का ऊपरी हिस्सा सख्त और भारी महसूस होने लगे, तब उसे काटने के लिए तैयार माना जाता है. घर में उगाई गई यह गोभी पूरी तरह ताजी और पेस्टिसाइड फ्री होती है, जिसे सलाद या सूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे स्तर पर इसकी खेती भी किचन का खर्च कम करने में मदद कर सकती है.

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