
West Bengal : विधानसभा चुनाव 2026 में मिली हार के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मतभेद और गहराते नजर आ रहे हैं। हाल के दिनों में पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि टीएमसी का भविष्य संकट में है, संगठन में असंतोष की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। इसके साथ ही कई नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने की भी खबरें सामने आई हैं।
इसी बीच, बुधवार को करीब 60 टीएमसी विधायक विधानसभा पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। सूत्रों का कहना है कि इन विधायकों का एक समूह पार्टी के भीतर अलग शक्ति केंद्र स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह गुट खुद को “वास्तविक तृणमूल” के रूप में पेश करने की तैयारी में है और विधानसभा अध्यक्ष को इस संबंध में प्रस्ताव सौंप सकता है, जिसमें विपक्षी दल के नेता और मुख्य सचेतक जैसे पदों को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
दो-तिहाई समर्थन का दावा और नेतृत्व को लेकर अटकलें
सूत्रों के अनुसार, इस संभावित गुट का नेतृत्व टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय को दिए जाने की संभावना है। उनका दावा है कि उनके पास करीब दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है, जो लगभग 52 सदस्यों के बराबर बताया जा रहा है। इसी दावे के बीच विधायकों की बैठक शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है।
विवाद की जड़ और शिकायत से शुरू हुआ मामला
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा की उस शिकायत से हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी थे।
पार्टी कार्रवाई और जांच की स्थिति
शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय ने मामला दर्ज कर जांच सीआईडी को सौंप दी। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दोनों विधायकों की भूमिका पर सवाल उठाए जाने के बाद टीएमसी ने ऋतब्रत और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।
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