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पहचान और धर्म पर बहस, वारिस पठान के बयान और बीजेपी-शिवसेना विवाद ने बढ़ाई गर्मी

BMC Elections : मुंबई महानगरपालिका चुनाव में इस बार बुनियादी मुद्दों की बजाय पहचान और धर्म से जुड़े बयान चर्चा में हैं. सड़क, नाली और साफ पानी जैसे अहम सवाल हाशिए पर चले गए हैं. राजनीतिक बहस मामू, बुर्केवाली और ममदानी जैसे संदर्भों पर केंद्रित रही. यह स्थिति बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और एआईएमआईएम के नेताओं के हाल के बयानों के आमने-सामने आने के बाद स्पष्ट हो रही है.

स्थानीय निकाय चुनाव आमतौर पर नागरिक सुविधाओं पर लड़े जाते हैं, लेकिन मुंबई में तस्वीर बदली हुई है. कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी पर मुस्लिम मतदाताओं को साधने का आरोप लग रहा है. वहीं बीजेपी हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में इसी मुद्दे को धार दे रही है. एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के बयान ने बहस को और हवा दी. पठान ने कहा कि जब ‘आई लव महादेव’ बोलने वाला मेयर बन सकता है, तो ‘आई लव मोहम्मद’ कहने वाला कोई या फिर हिजाब पहनने वाली मुंबई की मेयर क्यों नहीं बन सकती.

बीजेपी ने उद्धव ठाकरे को ‘उद्धव मामू’ कहा

वारिस पठान के बयान पर शिवसेना यूबीटी की चुप्पी को बीजेपी ने बड़ा मुद्दा बना दिया. बीजेपी का आरोप है कि उद्धव ठाकरे मुस्लिम वोट बैंक नाराज नहीं करना चाहते. इससे पहले छत्रपति संभाजी नगर में कांग्रेस के मुस्लिम नेता रशीद मामू को शिवसेना यूबीटी में शामिल करने पर भी सवाल उठे थे. इन्हीं घटनाओं के आधार पर बीजेपी ने उद्धव ठाकरे को नया नाम ‘उद्धव मामू’ देना शुरू किया.

अस्लम शेख और अमित साटम के बयान पर विवाद

न्यूयॉर्क के नए मेयर जोरन ममदानी द्वारा कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने के बाद विवाद बढ़ गया. कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा कि मुंबई का मेयर भी ममदानी जैसा होना चाहिए. मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने पलटवार करते हुए कहा कि ममदानी वही हैं जो उमर खालिद का समर्थन करते हैं. साटम ने यह भी दावा किया कि मलाड-मालवणी क्षेत्र में 4 महीने में मुस्लिम आबादी 10,000 बढ़ गई है.

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