Saket Building Collapse : सैदुलाजाब में चार मंजिला इमारत गिरने की घटना ने दिल्ली में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छह लोगों की मौत हुई, जबकि सात लोग घायल हैं और उनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।
घटना के 24 घंटे बाद भी एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और अन्य एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी रहीं, हालांकि शुरुआती दौर में पर्याप्त भारी मशीनें उपलब्ध न होने से बचाव कार्य की गति प्रभावित होने के आरोप सामने आए हैं।
बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि अनियंत्रित निर्माण और नियमों की अनदेखी लगातार जानलेवा साबित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई घंटे तक केवल जेसीबी से मलबा हटाया गया, जबकि भारी क्रेन समय पर नहीं पहुंच सकीं। इस इमारत में कोचिंग सेंटर, ऑफिस, कैफे और कैंटीन संचालित हो रहे थे, जहां बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद थे।
तेज आवाज और ढह गई पूरी इमारत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत ढह गई और कुछ ही सेकंड में इलाके में धूल का गुबार फैल गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई, जबकि कई मलबे में दब गए। छात्रों और स्थानीय लोगों ने बताया कि मौके पर मौजूद लोग अपने साथियों को बचाने के लिए दोबारा मलबे की ओर दौड़े, जिससे स्थिति और भी दर्दनाक हो गई।
दो इंजीनियरों को किया सस्पेंड
स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि उन्होंने पहले भी अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों को लेकर नगर निगम और पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना के बाद एमसीडी के बिल्डिंग विभाग के दो इंजीनियरों को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिन इमारतों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ सीलिंग और कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस करेगी गहनता से जांच
दिल्ली पुलिस ने गैर इरादतन हत्या समेत गंभीर धाराओं में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पहले मिली शिकायतों और सूचनाओं पर उचित कार्रवाई की गई थी या नहीं।
हादसे में गई कई युवाओं की जान
हादसे में कई युवाओं की जान गई, जिनमें मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र शामिल हैं। कुछ लोग कैंटीन में खाना खाने के लिए आए थे, जबकि कुछ कोचिंग और काम से जुड़े थे। पार्वती नामक कैंटीन संचालक की भी इस हादसे में मौत हो गई, जिसे स्थानीय छात्र “आंटी का ढाबा” कहते थे।
भारी दबाव बचाव कार्य में बड़ी चुनौती
एनडीआरएफ के अनुसार मलबे की जटिल संरचना और भारी दबाव बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सेंसर, डॉग स्क्वॉड और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से जीवित लोगों की तलाश की जा रही है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि समय बीतने के साथ जीवित बचने की संभावना बेहद कम रह गई है। अनुमान है कि मलबा हटाने का काम अगले दिन तक जारी रह सकता है।
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